एइएस नियंत्रण व समुचित प्रबंधन को लेकर टास्क फोर्स की डीएम के अध्यक्षता में हुई बैठक, दिये निर्देश

जबकि बीमारियों की पहचान नहीं होने पर, लेकिन एइएस के लक्षण पाये जाने पर इसे एइएस अननोन कहा जाता है. एक गंभीर बीमारी है.

बक्सर. जिला पदाधिकारी सह-अध्यक्ष-जिला स्वास्थ्य समिति बक्सर अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत एइएस नियंत्रण एवं समुचित प्रबंधन जिला स्तरीय हेतु जिला टास्क फोर्स की बैठक समाहरणालय परिसर स्थित कार्यालय कक्ष में को गई. जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक का उद्देश्य समुदाय स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों में मस्तिष्क ज्वर/एइएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) के मामले की रोकथाम, प्रबंधन हेतु स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करना है. मस्तिष्क ज्वर/एइएस के लक्षणों के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा एइएस अन्तर्गत कौन-कौन सी बीमारियां आती है, इसको चिन्हित किया गया है. जब पैथोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी की जांच में बीमारी की पहचान हो जाती है, तब उसे ए.ई.एस. नोन कहा जाता है. जबकि बीमारियों की पहचान नहीं होने पर, लेकिन एइएस के लक्षण पाये जाने पर इसे एइएस अननोन कहा जाता है. एक गंभीर बीमारी है. अधिकतर 1 से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं. चमकी के साथ तेज बुखार, सरदर्द, अर्द्ध या पूर्ण बेहोशी की प्रकार शामिल है. बिहार में मस्तिष्क ज्वर के मामले पूरे वर्ष आते रहते हैं, किन्तु ज्यादातर मामले अप्रैल से नवंबर माह के बीच प्रतिवेदित होते हैं. यह 15 वर्ष तक के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है तथा इससे संबंधित मृत्यु दर 20-30 प्रतिशत है. 1 से 15 वर्ष के कुपोषित बच्चों को, वैसे बच्चे जो धान के खेत के आसपास रहते हों, वैसे बच्चे जो जलीय पक्षी यथा सारस, बगुला, बत्तख के संपर्क में रहते हों, वैसे बच्चे जो गांव में सूअरबाड़ों के नजदीक रहते हो, वैसे बच्चे जो बिना भरपेट भोजन किये रात में सो जाते हों, वैसे बच्चे जो गर्मी के दिनों में बिना खाना पानी की परवाह किये धूप में खेलते हों, वैसे कुपोषित बच्चे जो कच्चे अथवा अधपके हुए लीची का सेवन करते हों एवं उपर्युक्त बच्चों में इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा होती है. रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं. यदि संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलाएं. रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि बच्च��� कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं. बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा दीदी को सूचित करते हुए तुरंत निः शुल्क 102 एम्बुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जायें. ये सावधानी आवश्यक है तेज धूप में जाने से बचें दिन में दो बार नहाएं रात में पूरा भोजन करके सुलाएं लक्षण दिखते ही ओआरएस का घोल या चीनी और नमक का घोल पिलाएं जिला पदाधिकारी द्वारा सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया कि वीएचएसडी दिवस पर आशा, एएनएम के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे. एइएस मरीजों को 102 एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे. सुअरबाड़ा से एक किलोमीटर परिधि में एवं महादलित टोला में विशेष ध्यान देना है. वहां पर 15 साल तक के बच्चों जो अप्रतिरक्षित हैं उन्हें भी वैक्सीनेशन करायेंगे.

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By Amlesh prasad

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