Buxar News : बक्सर कृषि विज्ञान केंद्र में वाटरएड इंडिया के प्रायोजन में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण में सिमरी प्रखंड की 12 पंचायतों से शामिल हुईं कृषि सखियों को जल संरक्षण, स्वच्छ जल, पोषक तत्व प्रबंधन, सतत कृषि में महिलाओं की भूमिका तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण का उद्देश्य जल के विभिन्न आयामों के प्रभावी उपयोग के साथ 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' को बढ़ावा देना रहा.
दीप प्रज्ज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रगतिशील कृषक एवं समाजसेवी ओमप्रकाश भुवन, कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. देवकरन, वाटरएड इंडिया के परियोजना समन्वयक हिमांशु शेखर तथा प्रतिभागी कृषि सखियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस अवसर पर डॉ. देवकरन ने कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला. उन्होंने सतत कृषि के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए मृदा जांच के बाद ही खेती करने की सलाह दी.
स्वच्छ जल और मानव स्वास्थ्य का खेती से गहरा संबंध
वाटरएड इंडिया के परियोजना समन्वयक हिमांशु शेखर ने कृषि सखी के रूप में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल और मानव स्वास्थ्य का खेती से गहरा संबंध है तथा इनके बिना कृषि संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि कृषि विफल होती है, तो इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है.
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कृषि सखियों को कौशल विकास और प्रभावी संचार की जानकारी
विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. रामकेवल ने प्रशिक्षणार्थियों को सतत कृषि में महिलाओं की भूमिका, कृषि सखियों के व्यवहार, आवश्यक गुण, कौशल विकास तथा प्रभावी संचार माध्यमों के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कृषि सखियों को किसानों तक उपयोगी जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया.
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प्राकृतिक खेती के घटकों की दी गयी सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी
विशेषज्ञ हरिगोबिंद ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों के बारे में प्रशिक्षण दिया. उन्होंने जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत आदि के संबंध में प्रशिक्षणार्थियों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी. प्रशिक्षण के दौरान कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों को व्यवहार में अपनाने के तरीकों से भी अवगत कराया.
