Buxar News : बक्सर जिले के केसठ प्रखंड में इस बार मानसून की अच्छी बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है. लगातार हो रही बारिश के कारण धान की रोपनी ने रफ्तार पकड़ ली है और खेतों में हरियाली नजर आने लगी है. अब तक की बारिश से न केवल खेतों में पर्याप्त नमी बनी है, बल्कि किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी जगी है.
प्रखंड के अलग-अलग गांवों में किसान सुबह से लेकर शाम तक खेतों में धान रोपनी के काम में जुटे हुए हैं. जहां पहले बारिश की कमी को लेकर चिंता बनी हुई थी, वहीं अब मौसम के अनुकूल होने से खेती-किसानी का माहौल पूरी तरह बदल गया है. बिचड़े और रोपे गए धान के पौधे खेतों में लहलहाने लगे हैं, जिससे किसानों का उत्साह बढ़ा हुआ है.
Paddy Farming : 1955 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य, 25 प्रतिशत रोपनी पूरी
प्रखंड कृषि पदाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि केसठ प्रखंड में इस वर्ष करीब 1955 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. अब तक लगभग 490 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपनी हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का करीब 25 प्रतिशत है.
उन्होंने कहा कि जुलाई माह समाप्ति की ओर है और अगले 15 से 20 दिनों तक धान रोपनी का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. ऐसे में किसान तेजी से रोपनी के काम को पूरा करने में जुटे हैं, ताकि समय रहते फसल तैयार हो सके.
Weather : 62.3 एमएम बारिश ने बढ़ाई रफ्तार
सोमवार को केसठ प्रखंड में 62.3 एमएम बारिश दर्ज की गई, जिससे खेतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो गई है. इस बारिश ने रोपनी के काम को और तेज कर दिया है. किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह समय-समय पर बारिश होती रही, तो धान की फसल काफी अच्छी होगी.
कृषि विभाग के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रखंड के सभी गांवों में शत-प्रतिशत धान रोपनी पूरी होने की संभावना है.
Agriculture : बेहतर उत्पादन से किसानों की बढ़ेगी आय
अधिकारियों का मानना है कि इस बार समय पर रोपनी पूरी हो जाने से धान की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी होगी. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे.
फिलहाल केसठ प्रखंड में खेती-किसानी की गतिविधियां जोरों पर हैं. किसान पूरी मेहनत के साथ खेतों में काम कर रहे हैं और अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे हैं. अब सबकी नजरें आगे होने वाली बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि मौसम का रुख ही तय करेगा कि इस साल किसानों को कितनी बेहतर पैदावार मिलती है.
