स्थापित होने के ढाई साल बाद भी शुरू नहीं हो सका सदर अस्पताल में आइसीयू

राजद के नेतृत्व में बिहार में पूर्व में बनी सरकार के काल में मिशन 60 के तहत 60 प्रकार के स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्य कराये गये.

बक्सर. राजद के नेतृत्व में बिहार में पूर्व में बनी सरकार के काल में मिशन 60 के तहत 60 प्रकार के स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्य कराये गये. जिसे टारगेट स्तर पर कराने के लिए समय सीमा निर्धारित किया गया था. इसी क्रम में मिशन 60 के तहत जिले में बड़े शहरों तथा बडे अस्पतालों की तहत सदर अस्पताल में मरीजों के लिए आईसीयू बनकर लगभग ढाई साल पूर्व बनकर पूरी तरह से तैयार हो गया है. लेकिन आईसीयू की सेवा अस्पताल प्रबंधन के साथ ही जिला स्वास्थ्य प्रबंधन के लापरवाही व मनमानी का भेंट चढ़ गया. जिसका लाभ जिले के मरीजों को 60 दिन की बजाय लगभग ढाई वर्ष अर्थात 900 दिनों के बाद भी नहीं शुरू हो सकी. कागजों में तो शुरू हो गया है लेकिन स्थल पर विभाग संचालित नहीं हो रहा है. जिसके कारण जिलेवासियों को इस आईसीयू की सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. जिस उदेश्य से सरकार ने इस महंगी इलाज की सेवा को लेकर स्थापित किया था उसमें अभी तक विभाग सफल नहीं हो पाया है. जिसके कारण क्रिटिकल मरीजों को अभी भी इलाज के लिए बनारस व पटना जाना मजबूरी है. जिससे मरीजों को हर प्रकार की चिकित्सकीय सुविधा सदर अस्पताल में मिल सके. जिसके बनने के बाद क्रिटिकल मरीजों को महंगी इलाज की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिलने की संभावना कायम हो गयी थी. लेकिन जिले वासियों को जिले में मिलने वाली आईसीयू की सुविधा अभी भी निर्माण के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. जिले के स्वास्थ्य विभाग आईसीयू के संचालन को लेकर काफी उदासीन बना हुआ है. जिसके कारण मिशन 60 योजना पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है. जिस उद्देश्य से मिशन 60 को 60 दिनों में ही शुरू कर देना था वह लगभग ढाई वर्ष में केवल कागज में ही शुरू हो सका है. इस बीच 14 फरवरी 2025 को सिविल सर्जन शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती द्वारा शुभारंभ कर देने का पत्र जारी कर दिया गया. जिस डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति की गई उन्होंने बीमारी को दर्शा लंबी छुट्टी ले लिया. जिसके बाद कागजों में ही आईसीयू संचालित हो रहा है. जिले में आईसीयू के शुरू से क्रिटिकल मरीजों का जीवन स्थानीय स्तर पर इलाज के साथ आसानी से बचाया जा सकता है. इससे मरीजों का आर्थिक दोहन भी नहीं होगा.

आइसीयू शुरू होने से मरीजों को त्वरित मिलेगा इलाज : सदर अस्पताल में 10 बेड की आईसीयू की सुविधा शुरू होने से क्रिटिकल मरीजों को स्थानीय स्तर पर शीघ्र इलाज मिलेगी. इससे अन्य जगहों पर घंटों ले जाने में लगने वाले समय की बचत होगी और समय से आवश्यक इलाज मिल जायेगा. महंगी इलाज स्थानीय स्तर पर आसानी से मरीजों को सस्ते में मिल जाती. जिससे मरीजों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी. सेवा शुरू होता तो आवश्यक मरीजों की अपेक्षाकृत आसानी से जान बचाई जा सकती है. जिन क्रिटिकल मरीजों को अन्य जगहों पर ले जाने के कारण तीन से चार घंटा में इलाज होता है वह तुरंत ही मिल जाता है. इससे मरीजों की जान अपेक्षाकृत ज्यादा बचाई जा सकती है. बाहर ले जाने में इलाज के अभाव में रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, उन्हें जल्द इलाज मिल जायेगा.

क्या है आइसीयू की सेवा : आइसीयू यानी इंटेंसिव केयर यूनिट अस्पताल की एक ऐसी इकाई है जहां गंभीर रोगों से ग्रसित व शारीरिक क्रियाएं अनियंत्रित होने पर इलाज दिया जाता है. जिससे गंभीर व जीवन मौत से जुझ रहे लोगों को बचाया जा सकता है. इस उद्देश्य से जिला में आईसीयू की सुविधा तैयार की गई है. बक्सर जिले में तैयार आईसीयू में हार्ट के मरीजों को फिलहाल सुविधा नहीं की गयी है. जिले के आवश्यक मरीजों को आईसीयू की इलाज के लिए बनारस एवं पटना का रुख करना पडता है.

आइसीयू में मरीजों को मिलती है सुविधा : वेंटीलेटर, इलेक्ट्रोइनसिफैलोग्राफी, डायलिसिस मशीन, सेंट्रल लाइन, पल्स ऑक्सीमीटर, इइजी बॉक्स व इलेक्ट्रोड्स, आईसीयू मैट्रेस, बेडसाइड मॉनिटर, इंट्रावीनस इंफ्यूजन पम्प, फीडिंग ट्यूब व पम्प, रेस्ट्रेंट्स, कैथेटर, कम्प्रेशन स्टॉकिनेट्स इसके अलावा आईसीयू में ईसीजी, एबीजी, सोनोग्राफी, पोर्टेबल एक्स-रे और इमरजेंसी दवाएं भी होगी.

बाहर जाने पर मरीजों को होती है आर्थिक क्षति : जिले में आइसीयू की सुविधा मिलने यदि शुरू की गयी होती तो मरीज आर्थिक दोहन से बच सकते हैं. बाहर के अस्पतालों में मरीजों का आइसीयू के नाम पर काफी दोहन किया जाता है. आइसीयू के नाम पर मोटी रकम की वसूली की जाती है. जिससे गरीब मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है. जिले में सेवा के शुरू होने से मरीज बच सकते है. जिससे उन्हें इस महंगी इलाज को कराने में आर्थिक दोहन का शिकार भी नहीं होना पड़ेगा.

क्या कहते हैं सीएस

आइसीयू संचालन को लिए आवश्यक सामानों एवं एनेस्थीसिया के डॉक्टर की कमी को लेकर विभाग को लिखा गया है. कमियों की पूर्ति होने के बाद चालू किया जायेगा.

शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती, सिविल सर्जन

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By Amlesh prasad

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