हिंदी दिवस पर हेरिटेज स्कूल में दिखी बच्चों की प्रतिभा, कविता-पाठ से भाषण तक हुईं कई प्रतियोगिताएं

बक्सर के हेरिटेज स्कूल में हिंदी दिवस धूमधाम से मनाया गया। निदेशक डॉ. प्रदीप पाठक ने हिंदी को संस्कृति की आत्मा बताते हुए छात्रों को सरल भाषा अपनाने की सलाह दी।

बक्सर. हिंदी दिवस के अवसर पर हेरिटेज स्कूल, अर्जुनपुर और हेरिटेज स्कूल, चरित्रवन की दोनों शाखाओं में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और जागरूकता के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. विद्यालय में नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं.

नन्हे बच्चों ने कविता-पाठ से जीता दिल

नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से कक्षा 5 तक के बच्चों ने कविता-पाठ प्रतियोगिता में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं. बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया.

विद्यार्थियों ने लेखन प्रतियोगिता में रखे विचार

कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए कविता लेखन, जबकि कक्षा 7 और 8 के लिए ‘आज के परिवेश में हिंदी का महत्व’ और ‘हिंदी की महत्ता एवं उपयोगिता’ विषय पर लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई. छात्रों ने हिंदी की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर अपने विचार रखे.

भाषण प्रतियोगिता में हिंदी की उपयोगिता पर चर्चा

कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों ने भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया. छात्रों ने चर्चा की कि शिक्षा, प्रशासन और दैनिक जीवन में हिंदी की उपयोगिता कैसे बढ़ाई जा सकती है.

भाषा विचारों और संस्कारों की अभिव्यक्ति

इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष प्रेम कुमार पाठक ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे विचारों, संस्कारों और संस्कृति को व्यक्त करने का सशक्त जरिया है. उन्होंने कहा कि भारत विविध भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना गौरव है. हिंदी अपनी सरलता और सहजता के कारण देश को जोड़ने में अहम भूमिका निभाती है.

सरल हिंदी के अधिक प्रयोग पर दिया जोर

प्रेम कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी को महत्व देना अन्य भाषाओं का अपमान नहीं है. उन्होंने सरकारी कार्यालयों में आम जन की सुविधा के लिए सरल हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की वकालत की.

गंगा-जमुनी तहज़ीब की प्रतीक है हिंदी-उर्दू

विद्यालय के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की आत्मा है. उन्होंने हिंदी दिवस के पुरोधा व्यौहार राजेंद्र सिंह को नमन करते हुए कहा कि हिंदी ने हमेशा भारत की विविधता को जोड़ा है.

फोटो- सम्मानित बेहतर प्रतिभागी | Prabhat Khabar Network

हिंदी को संवाद और संस्कृति की भाषा बनाने की अपील

डॉ. प्रदीप कुमार पाठक ने भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में हिंदी को मां और उर्दू को मौसी का स्थान प्राप्त है. उन्होंने कहा कि हिंदी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सरलता और सुलभता है, जिसे बिना किसी डिग्री के हर वर्ग समझ लेता है.

छात्रों से क्लिष्ट शब्दों से बचने को कहा

विद्यालय के निदेशक ने छात्रों से अपील की कि वे क्लिष्ट शब्दों से बचें. भाषा का उद्देश्य विद्वता दिखाना नहीं, बल्कि विचारों को दिल तक पहुंचाना है. उन्होंने छात्रों से हिंदी को विषय नहीं, बल्कि संवाद और संस्कृति की भाषा के रूप में अपनाने की अपील की.

सभी भाषाओं के सम्मान का दिया संदेश

अंत में विद्यालय परिवार ने छात्रों की प्रतिभा की सराहना करते हुए सभी भाषाओं के सम्मान का संदेश दिया.

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By आशुतोष सिंह

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