Buxar News: बक्सर जिले का सोनबरसा गांव का रहने वाला था चंदन मिश्रा, कम उम्र में ही बन गया था अपराधी

पटना पारस हॉस्पिटल में इलाज करा रहे कुख्यात चंदन मिश्रा के दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद एक बार फिर बक्सर जिला सुर्खियों में आ गया है

बक्सर कोर्ट . पटना पारस हॉस्पिटल में इलाज करा रहे कुख्यात चंदन मिश्रा के दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद एक बार फिर बक्सर जिला सुर्खियों में आ गया है, उसकी हत्या गुरुवार को न्यायालय परिसर में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा. बताते चले कि बक्सर जिले में शेरू चंदन के खिलाफ दर्जन से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे. जिसमें भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी की हत्या के बाद दोनों बिहार के मोस्ट वांटेड अपराधियों के लिस्ट में शामिल हो गए थे. अभी बक्सर न्यायालय में चंदन मिश्रा के खिलाफ बड़े अपराध संबंधित सेशन मामला 242/2011 जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश 2, 2015/2012 प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, 2016/2016 जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश 11, 165/1012 जिला व अपर सत्र न्यायाधीश 11 के न्यायालय में सुनवाई के लिए लंबित है. राजेंद्र केसरी हत्याकांड में भी चंदन था शामिल बहुत कम समय में जिले के लगभग एक दर्जन बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के बाद 11 अगस्त 2011 को भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी की सुबह 9:05 पर हत्या कर दी गयी थी, उस समय वे अपने दुकान पर बैठे हुए थे जब तीन अभियुक्त मोटरसाइकिल से सवार होकर आए जिसमें एक मोटरसाइकिल पर बैठा रहा जबकि दूसरा सड़क की तरफ रुख करके स्थानीय लोगों पर नजर बनाए हुए था, वहीं तीसरा अभियुक्त अपने दोनों हाथों में पिस्तौल लेकर दनदनाते हुए दुकान में घुस ताबड़तोड़ गोलीमार राजेंद्र केसरी की हत्या कर दिया. अत्यधिक व्यस्ततम रहने मेन रोड में स्थित भोजपुर चूना भंडार के मालिक की हत्या में चंदन मिश्रा एवं शेरू सिंह शामिल थे. हत्या को लेकर नगर थाना में कांड संख्या 231/ 2011 मृतक के चचेरा भाई आनंद केसरी ने दर्ज कराया था. हत्या के पीछे रंगदारी की मांग थी जहां एक दिन पूर्व चंदन मिश्रा ने मृतक के पुत्र गोपाल केसरी को धमकी देते हुए कहा था की रंगदारी नहीं देने पर दूसरे दिन दुकान खुलने के साथ ही गोली मार दूंगा. 1 साल के भीतर अपराधों का अंबार लगाकर चंदन ने पुलिस की नाक में दम कर रखा था. वही चर्चित व्यवसाय की हत्या के बाद पुलिस के सिर के ऊपर से पानी बहने लगा . शेरू सिंह और चंदन मिश्रा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया तथा लोकेशन के आधार पर दोनों की कोलकाता से गिरफ्तारी की गई. हवलदार को गोलीमार कोर्ट से फरार हो गया था शेरू चंदन शेरू की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई थी. अभियुक्तों द्वारा लगातार लोकेशन बदलने एवं मोबाइल का सिम चेंज करने के कारण बिहार एवं कोलकाता पुलिस को संयुक्त रूप से बड़ा अभियान चलाना पड़ा था. दोनों को जब गिरफ्तार कर बक्सर लाया गया तो लंबे अपराध लिस्ट के कारण सप्ताह में तीन से चार दिनों तक उन्हें न्यायालय में लाना भी पुलिस के लिए एक चुनौती थी. कड़ी सुरक्षा में दोनों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता था. दोनों इतने ज्यादा खतरनाक थे कि पुलिस एक अलग बस में इन्हें न्यायालय लाना पड़ता था जिसकी सुरक्षा में एक पायलट जीप भी चलाया जाता था. बीच 18 दिसंबर 2011 को न्यायालय में गवाही देकर हाजत जाने के क्रम में शेरू हवलदार को गोली मार चाहरदिवारी फांदकर न्यायालय से फरार हो गया था .शेरू को भगाने के लिए बड़ी साजिश रची गई थी जब वह लगभग शाम के 4:00 बजे कोर्ट रूम से गवाही देकर बाहर निकाला तो हवलदार से पेशाब करने के लिए बरामदे में बने वॉशरूम में ले चलने को कहा जहां पहले से लोडेड पिस्तौल के साथ मिर्च पाउडर रखा हुआ था जिसे शेरू ने उठा लिया तथा पुलिस वालों का आंखों में मिर्च झोंक भागने लगा जब हवलदार ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसके जबड़े में गोली मार चारदीवारी के दूसरी तरफ पहले से चालू अवस्था में खड़े चारपहिया वाहन से फरार हो गया था. दोनों के अपराध के क्षेत्र में वर्चस्व के कारण चंदन मिश्र को भागलपुर जेल स्थानांतरित किया गया वहीं शेरू पुरुलिया जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. पूरे जिले में लगाये गये थे पोस्टर राजेंद्र केसरी हत्याकांड के बाद शेरू चंदन की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने सभी हथकंडा अपनाया . जिले में पहली बार बड़े-बड़े ईनामी पोस्टर दोनों के स्केच के साथ प्रत्येक थाना एवं चौराहे पर लगा दिए गए. सूचना देने वाले को 50 हज़ार के नगद इनाम की घोषणा के साथ-साथ नाम गुप्त रखने का भी पुलिस द्वारा ऐलान किया गया था. मामूली विवाद में भी हत्या कर डालने वाले ऐसे अपराधियों के लिस्ट में कई हत्याएं शामिल है जिसमें बक्सर सेंट्रल जेल की सिपाही की हत्या चंदन मिश्रा ने दिन के लगभग 1:30 बजे सिंडिकेट नहर बस स्टैंड के पास गोली मारकर कर दी थी. हत्या के पीछे जेल के भीतर मामूली झड़प को कारण बताया गया था, जहां चंदन ने सिपाही को धमकी दिया था कि जेल से छूटने के बाद पहले हत्या तुम्हारी कर दूंगा और ऐसा कर डाला था. हाईकोर्ट ने भी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा मशहूर व्यावसायी राजेंद्र केसरी की हत्या का फैसला 3 अक्टूबर 2013 को स्पीडी ट्रायल के तहत बक्सर सेशन कोर्ट द्वारा सुनाया गया जिसमें चंदन मिश्रा और शेरू सिंह को आजीवन कारावास के साथ 10–10 हजार रुपए का अर्थदंड की सजा दी गयी थी. उक्त फैसला को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए चंदन मिश्रा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कहा था कि वह परिस्थितियों का शिकार हुआ है. न्यायिक हिरासत में होने और अपने हितों का देखभाल के लिए कोई करीबी रिश्तेदार नहीं होने के कारण अपने वकील को उचित निर्देश नहीं दे सका जिससे गवाहों का जिरह नहीं हुआ उसने यह भी फ़रियाद किया था कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए जिसके अनुसार किसी को तब तक दंडित नहीं किया जा सकता है जब तक उसे अपने बचाव का अवसर नहीं मिले ऐसे में मामले को एक बार फिर सुनवाई के लिए बक्सर कोर्ट में रिमांड करने का प्रार्थना किया लेकिन न्यायालय ने इस बात पर सहमति व्यक्त किया था की निष्पक्ष सुनवाई को विकृत करने का अभियुक्त द्वारा प्रयास किया गया है अपीलकर्ता कुख्यात चंदन मिश्रा अभियोजन पक्ष को प्रभावित कर सकता है इसलिए उसके प्रार्थना को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उक्त मामले में चंदन भागलपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था जहां से इलाज के लिए उसे पारस अस्पताल लाया गया था जहां उसकी गुरुवार को हत्या कर दी गई.

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