Buxar News : ब्रह्मपुर प्रखंड की उत्तरी नैनीजोर पंचायत में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने शनिवार को इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) और भाकपा (माले) की टीम पहुंची. टीम ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से मुलाकात की और राहत-बचाव व्यवस्था की जानकारी ली. टीम में आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुशवाहा, युवा नेता बीरन यादव, सुरेंद्र कुशवाहा, निर्भय यादव और सुरेश राम शामिल थे.
तीन गांव पूरी तरह पानी से घिरे
पंचायत के ढाबी, गजाधर डेरा और तार गांव पूरी तरह पानी से घिर चुके हैं. संपर्क मार्ग बंद होने के कारण ग्रामीणों को भोजन, पेयजल, दवा और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, मवेशियों के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया है.
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लाइफ जैकेट नहीं होने पर आरवाईए ने उठाये सवाल
आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुशवाहा ने कहा कि बाढ़ की भयावह स्थिति के बावजूद सरकारी राहत और बचाव के इंतजाम बेहद नाकाफी हैं. प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए पर्याप्त बड़ी मोटर चालित नावें उपलब्ध नहीं हैं. डेंगी नावों से यात्रा करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त लाइफ जैकेट भी उपलब्ध नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि अधिकारी खुद लाइफ जैकेट पहनकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, जबकि आम ग्रामीणों को भगवान भरोसे नावों से आवागमन करना पड़ रहा है. यह गंभीर लापरवाही है और इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
एसडीएम से तत्काल राहत-बचाव व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
डॉ. कुशवाहा ने बताया कि उत्तरी नैनीजोर पंचायत की बाढ़ की स्थिति से डुमरांव एसडीएम को अवगत कराया गया है. उन्होंने प्रशासन से तत्काल राहत और बचाव व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है.
बाढ़ प्रभावित पंचायत के लिए पांच सूत्री मांगें रखीं
आरवाईए और भाकपा (माले) ने उत्तरी नैनीजोर पंचायत को तत्काल बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की है. इसके साथ ही पर्याप्त मोटर चालित नाव और लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने, बाढ़ प्रभावित गांवों में 24 घंटे मेडिकल कैंप लगाने, प्रभावित परिवारों को तत्काल सूखा राशन और पेयजल उपलब्ध कराने तथा मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने की मांग की गयी.
मांगें नहीं मानी गयीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
डॉ. कुशवाहा ने कहा कि राहत के नाम पर खानापूर्ति बंद कर सरकार को युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाना चाहिए. यदि बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो उनके अधिकारों के लिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
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