buxar news : दो माह पूर्व प्रतिनियुक्ति का आदेश, पर अब भी जमे हैं डीपीओ स्थापना

buxar news : शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने वरीय अधिकारियों के आदेश का उल्लंघन करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं

बक्सर. शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने वरीय अधिकारियों के आदेश का उल्लंघन करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं. शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारी के आदेशों का जिले में उल्लंघन करना कोई नई बात नहीं है. क्रम में जिले के कार्यक्रम पदाधिकारी विष्णु कांत राय जो वर्तमान में जिला शिक्षा कार्यालय में डीपीओ स्थापना के पद पर स्थापित हैं. दो माह पूर्व इनकी प्रतिनियुक्ति कैमूर जिले में होने के बावजूद बक्सर जिले में जमे हुए हैं. इन दोनों विधानसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता भी लग चुका है इसके बावजूद बक्सर जिले में अपने पद पर जमे हुए हैं. शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक प्रशासन मनोरंजन कुमार के पत्र के माध्यम से स्थानांतरण आदेश निर्गत किया गया था. जिसमें सूबे के कुल 21 पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी. सूची में बक्सर से दो पदाधिकारी शारिक अशरफ और विष्णुकांत राय का नाम शामिल था. इस क्रम में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शारिक अशरफ ने अपने निर्धारित जिले में पदस्थापना के बाद योगदान कर लिया है, लेकिन विष्णु कांत राय अभी भी जिला में बने हुए है. ज्ञात हो कि आदर्श आचार संहिता लगने से एक-दो दिन पूर्व जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों का तबादला हुआ है. निर्देशों का पालन करते हुए आचार संहिता लगने से पूर्व सभी ने अपने तत्काल पोस्टिंग वाली जगह पर पहुंच कर योगदान कर लिया है, ताकि निर्वाचन आयोग का कोपभाजन नहीं बनना पड़े. डीपीओ स्थापना पर जिले के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत सफाई एजेंसी को आर्थिक लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगा है. उस एजेंसी फर्स्ट आइडिया को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है, जिसे जिले में गलत ढंग से चयन किया गया है तथा जांच की प्रक्रिया चल रही है. स्थानांतरण के बाद भी अपने स्थानांतरण वाले जिले में अब तक योगदान नहीं करने को लेकर अब सवाल भी उठ रहे हैं. सफाई एजेंसी की तरह अन्य लोगों को तो अभी फायदा पहुंचाने की मंशा तो नहीं है. जिले के शिक्षा विभाग हमेशा अपने नियम विरुद्ध कार्यों के लिए ही चर्चा में बना रहता है. इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन ने बताया कि जिले में डीपीओ की कमी को देखते हुए इन्हें रोका गया है. इन्हें जिला में रोकने को लेकर विभाग को पत्र दिया गया है. लेकिन अभी तक इस संबंध में विभाग से कोई आदेश प्राप्त नहीं है.

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Published by: Shailesh kumar

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