Buxar News : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी और कर्मनाशा नदी पर बढ़ते दबाव से चौसा प्रखंड में बाढ़ का खतरा गहरा गया है. अखौरीपुर गोला के पास चौसा-मोहनिया हाईवे पर करीब दो फीट तक बाढ़ का पानी चढ़ गया है. सड़क पर पानी का बहाव जारी रहने से छोटे वाहनों का परिचालन कभी भी ठप होने की स्थिति में पहुंच सकता है. वहीं बाढ़ का पानी थर्मल पावर क्षेत्र और महर्षि च्यवन महाविद्यालय के परिसर में भी प्रवेश कर गया है.
हाईवे पर बह रहा पानी, छोटे वाहनों के परिचालन पर संकट
अखौरीपुर गोला के पास चौसा-मोहनिया हाईवे पर बाढ़ का पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित होने लगा है. करीब दो फीट पानी सड़क पर बह रहा है. पानी का स्तर और बढ़ने पर छोटे वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद होने की आशंका है. इससे चौसा और आसपास के इलाकों के लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है.
थर्मल प्लांट का कोयला ढोने वाला रास्ता डूबा
बाढ़ के पानी की चपेट में थर्मल पावर क्षेत्र भी आ गया है. थर्मल प्लांट के लिए कोयला ले जाने वाला मुख्य रास्ता पानी में डूब चुका है. इसके बाद कोयले की ढुलाई के लिए वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की जा रही है. इससे प्लांट तक कोयला पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका है.
गंगा के उफान से कर्मनाशा नदी पर बढ़ा दबाव
गंगा नदी में उफान के कारण कर्मनाशा नदी पर भी पानी का दबाव बढ़ गया है. कर्मनाशा का पानी जलीलपुर, रामपुर और तिवाय गांव के निचले हिस्सों तक पहुंच गया है. तिवाय गांव में धर्मावती नदी का पानी फैलने से करीब पांच घर पानी से घिर गए हैं.
बनारपुर की मल्लाह बस्ती सबसे ज्यादा प्रभावित
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर बनारपुर गांव की मल्लाह बस्ती में देखने को मिल रहा है. यहां करीब चार दर्जन घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है. पानी घरों तक पहुंचने के बाद लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ सुरक्षित आवागमन की समस्या भी खड़ी हो गयी है.
आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का असर
बाढ़ के पानी से चौसा, बनारपुर, नरबतपुर, रोहिणीभान, सिकरौल, रामपुर, तिवाय और धरमपुरा समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं. निचले इलाकों में पानी फैलने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. ग्रामीण इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
सैकड़ों एकड़ फसलें डूबीं, पशुचारे का संकट
बाढ़ के पानी से सैकड़ों एकड़ में लगी धान, पशुचारा और सब्जी की फसलें डूबकर बर्बाद हो गयी हैं. खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है. वहीं पशुचारा डूब जाने के कारण पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है. भूसे की कमी के कारण पशुपालकों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है.
प्रशासन ने शुरू की निगरानी
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है. नदी के जलस्तर और पानी के फैलाव की निगरानी की जा रही है. स्थिति बिगड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी भी रखी जा रही है.
