बक्सर. पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगरी बक्सर में सदियों से मनाए जा रहे पावन वामन द्वादशी महापर्व पर इस बार लोक आस्था और जनभावनाओं पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन का वीवीआईपी सुरक्षा पहरा भारी पड़ गया है. 23 सितंबर को मुख्यमंत्री के बक्सर दौरे को लेकर जिला प्रशासन द्वारा की गई अभेद्य घेराबंदी और कड़े प्रतिबंधों ने आम श्रद्धालुओं के लिए भगवान के दर्शन को बेहद कठिन बना दिया है. त्रेतायुग से जुड़े भगवान वामन के जन्मोत्सव पर लगने वाले ऐतिहासिक त्रिमुहानी मेले में दूर-दराज के गांवों और सीमावर्ती जिलों से पहुंचे हजारों भक्तों को प्रशासनिक बंदिशों के चलते भारी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है.
बांस-बल्लों की बैरिकेडिंग से मंदिर परिसर सील
मुख्यमंत्री के वीवीआईपी कारकेड और उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के नाम पर केंद्रीय कारा परिसर स्थित भगवान वामनेश्वर मंदिर को चारों तरफ से बांस-बल्लों की बैरिकेडिंग कर छावनी में तब्दील कर दिया गया है. वर्षों से बिना किसी बाधा के आराध्य के दर्शन करने वाले आम श्रद्धालुओं को मंदिर से सैकड़ों मीटर पहले ही पुलिसिया जांच और बैरियरों पर रोका जा रहा है. कड़े पहरे के कारण सबसे अधिक परेशानी महिला श्रद्धालुओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है. भक्ति और उल्लास का पारंपरिक आध्यात्मिक वातावरण प्रशासनिक तनाव और सख्ती के बीच सिमट कर रह गया है.
ट्रैफिक डायवर्जन से थमी राह
वामन द्वादशी पर गंगा, कर्मनाशा और ठोरा नदी के संगम के आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा पारंपरिक त्रिमुहानी मेला पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण का शिकार हो गया है. मुख्यमंत्री के आवागमन रूट और चुरामनपुर स्थित कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा के नाम पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सख्त ट्रैफिक रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है. सभी प्रकार के निजी और यात्री वाहनों के प्रवेश पर रोक लगने से ग्रामीण इलाकों से आने वाले भक्त कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर मेला क्षेत्र पहुंचने को मजबूर हैं.
इधर, मेले में खिलौने, पारंपरिक मिठाइयां, चूड़ियां और पूजा सामग्री की दुकानें लगाने पहुंचे छोटे व्यापारियों का धंधा भी वीवीआईपी बंदोबस्त की भेंट चढ़ गया है. बैरिकेडिंग और पाबंदियों के चलते मेले में ग्राहकी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे गरीब दुकानदारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
स्थानीय लोगों का आक्रोश: आस्था को न बनाया जाए प्रशासनिक शक्ति प्रदर्शन
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. लोगों का कहना है कि बक्सर की मूल पहचान महर्षि विश्वामित्र और भगवान वामन की तपोभूमि से है. मुख्यमंत्री का स्वागत होना स्वाभाविक है, लेकिन सनातन आस्था के इस पावन पर्व को नेताओं और अफसरों के शक्ति प्रदर्शन का जरिया बनाना अनुचित है. वीवीआईपी के दर्शन को सुगम करने के लिए आम भक्तों को भगवान की चौखट से दूर रखना जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है. स्थानीय लोगों ने दो-टूक कहा कि प्रशासन को सुरक्षा प्रबंधों के साथ-साथ लोक आस्था और आम नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं का संतुलन जरूर बनाना चाहिए था.
Also Read: बक्सर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्वागत का इंतजार खत्म, दुल्हन की तरह सजा शहर
