बक्सर ओपन जेल : उम्रकैद के कैदियों के लिए बनी नई जिंदगी की राह, सलाखों में रहते हुए भी भरोसे पर जी रहे आजाद जीवन

बक्सर की ओपन जेल उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को पश्चाताप, अनुशासन और भरोसे के सहारे एक नई ज़िंदगी जीने का मौका दे रही है. यहाँ कैदी दिन भर काम करते हैं और शाम को अपने परिवार के साथ घर लौटते हैं.

Buxar Open Jail Story : बक्सर में हत्या के मामले में कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिलने के बाद जिंदगी सलाखों के पीछे सिमट जाती है. लेकिन यहां एक ऐसी जगह है, जहां सजा काट रहे कैदी पश्चाताप, अनुशासन और भरोसे के सहारे एक नई जिंदगी जी रहे हैं. दिन भर शहर में काम करते हैं और शाम होते ही वापस जेल लौट आते हैं. वहीं अपने घर में पत्नी और बच्चों के साथ चाय पीते हुए जिंदगी के नए मायने तलाशते हैं.

यह कहानी है बिहार के इकलौते ओपन जेल की, जो बक्सर में स्थित है. यहां फिलहाल 82 सजायाफ्ता कैदी रह रहे हैं. इस जेल में अनुशासन, आत्मनिर्भरता और पुनर्वास का ऐसा मॉडल अपनाया गया है, जो कैदियों को समाज में फिर से सम्मान के साथ जीने का मौका दे रहा है.


बक्सर का ओपन जेल की तस्वीर

35 एकड़ में फैला है ओपन जेल परिसर

बक्सर सेंट्रल जेल के परिसर में ही करीब 35 एकड़ में यह ओपन जेल बना हुआ है. इसका उद्घाटन 23 मई 2012 को पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. यहां कैदियों के रहने के लिए 13 ब्लॉक बनाए गए हैं. हर कैदी को रहने के लिए एक वन बीएचके फ्लैट दिया गया है.

इसकी खास बात यह है कि यहां कैदी अपने परिवार के साथ रहते हैं. पत्नी, बच्चे और अन्य आश्रित भी उनके साथ रह सकते हैं. कैदियों को खाने के लिए राशन दिया जाता है, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों की व्यवस्था उन्हें खुद करनी होती है. इसके अलावा यहां ओपीडी, मंदिर, खेल मैदान और कम्यूनिटी हॉल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.

Buxar News : दिनभर बाहर, शाम को वापस जेल

ओपन जेल के नियमों के अनुसार, कैदी सुबह 6:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक जेल से बाहर रह सकते हैं. इस दौरान उन्हें जेल से पांच किलोमीटर के दायरे में ही रहना होता है. शाम होते ही उन्हें वापस लौटना अनिवार्य होता है. अगर कोई कैदी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे वापस सेंट्रल जेल में भेज दिया जाता है, जहां फिर से कड़ी निगरानी में रहना पड़ता है. इसलिए यहां रहने वाले सभी कैदी नियमों का सख्ती से पालन करते हैं.

ई-रिक्शा से लेकर प्लंबर और पेंटर तक का काम

बक्सर ओपन जेल की क्षमता 104 कैदियों की है, लेकिन फिलहाल यहां 82 कैदी रह रहे हैं. सभी कैदी हत्या के मामलों में सजा काट रहे हैं. यहां महिला कैदियों के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें नहीं रखा जाता. यहां रहने वाले कैदी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं. करीब 40 से ज्यादा कैदी टेंपो या ई-रिक्शा चलाते हैं. इसके अलावा कई कैदी प्लंबर, दर्जी, पेंटर और लेखक के रूप में भी काम कर रहे हैं. कुछ कैदी अन्य रचनात्मक कार्यों में भी लगे हुए हैं.

कैदी से बने होम्योपैथिक डॉक्टर

इस ओपन जेल की एक खास कहानी भभुआ के ओम प्रकाश पांडेय की भी है. वर्ष 1999 में हत्या के एक मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी. सजा से पहले उन्होंने बीएचएमएस की पढ़ाई की थी और चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहे थे. जेल में आने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. 2012 में जब ओपन जेल की शुरुआत हुई, तो उन्हें यहां आने का मौका मिला. शुरुआत में उन्होंने जेल गेट के बाहर बैठकर मरीजों का इलाज करना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने किराए पर कमरा लेकर अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी.

ओम प्रकाश पांडेय की तस्वीर

आज वे शहर के जाने-माने होम्योपैथिक डॉक्टर बन चुके हैं और समाज में अपनी नई पहचान बना ली है.

राधेश्याम पाठक लिख चुके हैं दो दर्जन से ज्यादा पुस्तकें

राधेश्याम पाठक 'रवीन्दु' सीवान जिले के रहने वाले हैं. हत्या के मामले में जब इन्हें सजा हुई, तो शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे. सीवान मंडल कारा से इन्हें बक्सर सेंट्रल जेल भेजा गया. यहां पर उनके अच्छे आचरण को देखते हुए ओपेन जेल में शिफ्ट किया गया, तो जैसे उन्हें नया जीवन मिल गया. पढ़ने-लिखने का सिलसिला शुरू हुआ, तो एक के बाद एक कई किताबें लिखते चले गये. रवीन्दु अब तक दो दर्जन से अधिक किताबें लिख चुके हैं. इनमें से ज्यादातर पुस्तकें धार्मिक विषयों की समीक्षा के रूप में हैं. सभी कैदी और अधिकारी भी उन्हें 'बाबा' कहकर बुलाते हैं.

राधेश्याम पाठक द्वारा लिखित किताब

अच्छा व्यवहार, अनुशासन व आधी सजा पूरी होने के बाद ही मिलता है ओपेन जेल

ओपेन जेल में किसी भी कैदी को नहीं रखा जाता, बल्कि इसके लिए पात्रता की शर्तों को पूरा करना होता है. बक्सर ओपेन जेल के अधीक्षक मनीष कुमार बताते हैं कि यहां वहीं कैदी रखे जाते हैं, जिन्होंने क्रूर, घृणित, अनैतिक और अमानवीय अपराध न किया हो. जैसे रेप, नरसंहार या आतंकवादी गतिविधियों जैसा अपराध न किया हो. जिनसे गलती से कोई अपराध तो हो गया, लेकिन अब पश्चाताप कर रहे हैं. उम्र 30 वर्ष से ज्यादा और कम से कम आधी सजा पूरी हो गयी हो. जेल में अनुशासित और अच्छा आचरण रहा हो. जिस अपराध में सजा काट रहा है, उसके अलावे अन्य कोई केस न हो. इसके बाद जेल प्रशासन की अनुशंसा और राज्य दंडादेश परिषद के अनुमोदन के बाद ही ओपेन जेल में भेजा जाता है.

बक्सर ओपेन जेल के अधीक्षक मनीष कुमार

देश भर में 91 ओपेन जेल

वर्तमान में देश भर में 91 ओपेन जेल संचालित है, जो 17 राज्यों में स्थित हैं. इनमें बिहार का इकलौता ओपेन जेल बक्सर में है. वहीं, पश्चिम बंगाल में कैदियों के सुधार के लिए 'ओपेन-एयर करेक्शनल होम' की व्यवस्था है, तो झारखंड के हजारीबाग में एक ओपेन जेल है, जहां विशेष रूप से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सामान्य जीवन जीने और अपने परिवार के साथ रहने का मौका दिया जाता है. राजस्थान में सबसे अधिक 41 और महाराष्ट्र में 19 ओपेन जेल हैं.

नई उम्मीद की मिसाल बना ओपन जेल

बक्सर का यह ओपन जेल इस बात की मिसाल है कि अगर सही मौका और भरोसा मिले, तो कोई भी व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखकर नई जिंदगी शुरू कर सकता है. यहां कैदी सजा भी काट रहे हैं और साथ ही समाज में वापस लौटने की तैयारी भी कर रहे हैं.

प्रशासन का यह प्रयोग अब एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में अन्य जगहों पर भी लागू किया जा सकता है. यह पहल न सिर्फ कैदियों के जीवन को बदल रही है, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दे रही है.


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लेखक के बारे में

Author: Arvind Kumar Ojha

Published by: Ragini Sharma

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