Buxar News : (संतोष कांत) औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करते हुए जेके सीमेंट फैक्ट्री ने कांट गांव में हरित क्रांति की मिसाल पेश की है. एक साल पहले कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और पर्यावरण सुरक्षा अभियान के तहत लगाए गए 10 हजार इमारती पौधे अब पूरी तरह लहलहाने लगे हैं.
फैक्ट्री प्रबंधन की वैज्ञानिक देखरेख, आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी के कारण पौधों की उत्तरजीविता दर 90 प्रतिशत से अधिक रही है. महज एक वर्ष में फैक्ट्री परिसर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हरियाली की नई चादर बिछ गई है.
इमारती और छायादार पौधों को दी प्राथमिकता
जेके सीमेंट ने इस अभियान में केवल ऐसे पौधों का चयन किया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ दीर्घकालिक लाभ भी दें. इनमें मुख्य रूप से सागवान, शीशम, नीम, पीपल, महुआ और देशी बबूल जैसे पौधे लगाए गए. विशेषज्ञों के अनुसार सागवान और शीशम मजबूत लकड़ी और अधिक कार्बन अवशोषण क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जबकि नीम और पीपल वायु शुद्धिकरण में बेहद प्रभावी माने जाते हैं.
ड्रिप इरिगेशन से मिली सफलता
फैक्ट्री प्रबंधन ने पौधों की देखभाल के लिए समर्पित ‘ग्रीन टीम’ और उद्यान विशेषज्ञों की तैनाती की थी. जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन प्रणाली लगाई गई, जिससे हर पौधे तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाया गया. जैविक खाद और समय पर कीटनाशकों के उपयोग से पौधों की वृद्धि तेज हुई और आज उनकी ऊंचाई 5 से 8 फीट तक पहुंच चुकी है.
सुरक्षा व्यवस्था रही अहम
फैक्ट्री के सुरक्षा अधिकारी गजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पौधों को मवेशियों और बाहरी नुकसान से बचाने के लिए पूरे क्षेत्र की कंटीले तारों से घेराबंदी की गई और विशेष सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए. प्लांट हेड एपी सिंह ने कहा कि हमारे लिए पर्यावरण की सुरक्षा ही फैक्ट्री और समाज की असली सुरक्षा है. आज इन पौधों को बढ़ते देख पूरी टीम को गर्व महसूस हो रहा है.
स्थानीय लोगों ने की सराहना
ग्रामीणों का कहना है कि पहले औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण वातावरण में धूल और भारीपन महसूस होता था, लेकिन हरियाली बढ़ने से अब हवा पहले से अधिक स्वच्छ और ताजा लग रही है. इस हरित पट्टी के विकसित होने से स्थानीय पक्षियों, तितलियों और छोटे जीवों को भी नया आश्रय मिला है, जिससे क्षेत्र में जैव विविधता को बढ़ावा मिला है.
अगले चरण में लगेंगे 5 हजार फलदार पौधे
जेके सीमेंट प्रबंधन अब आगामी मानसून में दूसरे चरण की तैयारी कर रहा है. योजना के तहत स्थानीय स्कूलों, पंचायत भवनों और सामुदायिक स्थलों पर 5 हजार फलदार पौधे लगाए जाएंगे. कंपनी के अनुसार इस चरण में आम, जामुन और अमरूद जैसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों और बच्चों को भविष्य में पोषण और आर्थिक लाभ भी मिल सके.
