डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट
Buxar Mobile Tower News: डुमरांव थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 18 में स्थापित मोबाइल टावर से जनरेटर एवं अन्य कीमती उपकरणों के गायब होने के मामले में पुलिसिया जांच के दौरान एक बड़ा और नया मोड़ सामने आया है. प्रारंभिक जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और गायब जनरेटर समेत कई उपकरणों का पता लगा लिया गया है. पुलिस का साफ कहना है कि यह मामला सामान्य चोरी का नहीं है, बल्कि आपसी भुगतान एवं आर्थिक लेन-देन के विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है.
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा
डुमरांव थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि टावर कंपनी द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी. जांच के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि टावर से गायब 15 केवीए का भारी-भरकम जनरेटर चक्की प्रखंड स्थित सोन होटल के संचालक के पास रखा गया है. पुलिस के अनुसार, जमीन मालिक ने पूछताछ में साफ बताया कि जनरेटर को बेचा नहीं गया है, बल्कि सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वहां रखा गया था. उन्होंने पुलिस को आश्वासन दिया है कि जनरेटर जल्द ही खुद थाने में जमा करा दिया जाएगा. हालांकि टावर से जुड़े अन्य छोटे उपकरणों का अब तक पूरी तरह पता नहीं चल सका है.
जनरेटर सुरक्षित, छोटे उपकरण बेचे जाने की आशंका
थानाध्यक्ष ने बताया कि जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि जनरेटर को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था. वहीं, टावर से जुड़े कुछ छोटे उपकरणों को बाजार में बेचे जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है. पुलिस अब ऐसे गायब उपकरणों की बरामदगी और पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.
नौ वर्षों से भुगतान नहीं मिलने पर जमीन मालिक ने उठाया कदम
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि टावर कंपनी और जमीन मालिक के बीच लंबे समय से भुगतान को लेकर बड़ा विवाद चल रहा था. थानाध्यक्ष के अनुसार, वर्ष 2009 में इस मोबाइल टावर को स्थापित किया गया था और वर्ष 2017 तक कंपनी की ओर से जमीन मालिक को नियमित भुगतान किया जाता रहा. आरोप है कि वर्ष 2017 के बाद से लेकर जून 2026 तक कंपनी द्वारा भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया. इसी दौरान टावर में तकनीकी खराबी आने के कारण उसका संचालन भी ठप हो गया था और लंबे समय तक कंपनी की ओर से कोई देखरेख नहीं की गई.
पुलिस के अनुसार, इसी परिस्थिति से तंग आकर जमीन मालिक ने टावर के कई उपकरणों को खुद खोलकर अलग-अलग स्थानों पर रख दिया. हालांकि, प्रारंभिक जांच में कुछ छोटे उपकरणों के बेचे जाने की बात भी सामने आई है.
जमीन मालिक ने टावर कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
जिस जमीन पर यह मोबाइल टावर स्थापित था, उसके मालिक ने भी कंपनी पर समझौते (एग्रीमेंट) के अनुरूप भुगतान नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि कंपनी के साथ बकायदा विधिवत एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन उन्हें उनका पूरा रेंट नहीं मिला. उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने उन्हें तीन हजार रुपये मासिक मानदेय पर गार्ड के रूप में नौकरी पर रखा था, लेकिन उनके भुगतान संबंधी कई मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हैं.
तकनीकी टीम के निरीक्षण में ऐसे हुआ मामले का खुलासा
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की तकनीकी टीम लंबे समय से बंद पड़े मोबाइल टावर को दोबारा चालू और रीस्टार्ट करने के लिए मौके पर पहुंची. निरीक्षण के दौरान टीम ने देखा कि टावर परिसर से जनरेटर समेत कई महत्वपूर्ण उपकरण पूरी तरह गायब हैं. इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने डुमरांव थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की. लगभग 130 फीट ऊंचे इस मोबाइल टावर से जुड़े कई मुख्य उपकरण मौके पर नहीं मिलने के कारण कंपनी ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को सूचना दी थी.
पुलिस बोली- चोरी, भुगतान और अनुबंध के हर पहलू की हो रही जांच
पुलिस का कहना है कि बरामद किए जा रहे उपकरणों का सत्यापन किया जा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में इन उपकरणों को वहां से हटाया गया. मामले में चोरी, भुगतान विवाद और अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) संबंधी सभी कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है. थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि जांच काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही पूरे मामले का अंतिम खुलासा कर दिया जाएगा.
क्या है पूरा मामला ?
गौरतलब है कि जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के एल एंड ओ ऑफिसर बैद्यनाथ ओझा ने 10 जून 2026 को डुमरांव थाना में आवेदन देकर बताया था कि कंपनी का मोबाइल टावर डुमरांव निवासी हरेनाथ यादव की जमीन पर स्थापित था. कई वर्षों से बंद पड़े इस टावर को पुनः चालू करने की प्रक्रिया के तहत 2 जून 2026 को निरीक्षण किया गया था. निरीक्षण में पाया गया कि 40 मीटर ऊंचा मोबाइल टावर, 15 केवीए डीजल जनरेटर तथा अन्य सहायक उपकरण स्थल से गायब हैं. कंपनी ने अपने स्तर पर जांच के बाद घटना को सही पाया और आवश्यक दस्तावेजों के साथ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का आवेदन दिया था, जिसमें अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी.
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