डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट
Buxar News: डुमरांव थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या 18 में स्थापित एक मोबाइल टावर से उपकरण और अन्य सामान गायब होने का मामला सामने आया है. इस घटना का खुलासा तब हुआ जब जीटीएम इंफ्रास्ट्रक्चर की टीम बंद पड़े टावर को दोबारा चालू करने और रीस्टार्ट करने के लिए मौके पर पहुंची. सामान गायब मिलने के बाद कंपनी की ओर से डुमरांव थाना में लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की गई है.
रीस्टार्ट करने पहुंची टीम को खाली मिला टावर
जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर टावर स्थापित किया गया था, वहां से टावर के कुछ महत्वपूर्ण उपकरण और जनरेटर सहित अन्य सामान गायब पाए गए. कंपनी के प्रतिनिधियों का आरोप है कि टावर लंबे समय से खराब होने के कारण बंद पड़ा था. जब तकनीकी टीम उसे फिर से चालू करने पहुंची, तो वहां कई आवश्यक उपकरण नहीं मिले, जिसके बाद हड़कंप मच गया.
पुलिस का दावा: फिलहाल चोरी की बात स्पष्ट नहीं
मामले को लेकर प्रभारी थानाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने बताया कि टावर से कुछ सामान गायब होने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ है और जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जमीन मालिक (ऑनर) के अनुसार कंपनी के कुछ कर्मचारी तीन दिनों तक वहां रहकर कार्य कर रहे थे और उपकरण खोलकर अपने साथ ले गए थे. थानाध्यक्ष ने बताया कि टावर परिसर में दो-तीन लोग रहते थे और वहीं खाना भी बनाते थे. उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल चोरी की बात स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ रही है, क्योंकि तीन दिन या चार दिन बैठकर वहां पर चोर चोरी नहीं करेगा.
दोनों पक्षों को बुलाया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा थाना
पुलिस के अनुसार मामले की सच्चाई जानने के लिए कंपनी प्रतिनिधियों और जमीन मालिक दोनों को शुक्रवार को थाना बुलाया गया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ. पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों से पूछताछ के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.
जांच के बाद सामने आएगा सच
थानाध्यक्ष ने बताया कि कंपनी की ओर से आवेदन मिलने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. हालांकि अब तक किसी प्रकार की प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की गई है. पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामला चोरी और आपसी विवाद के बीच उलझा हुआ दिखाई दे रहा है. एक ओर कंपनी उपकरण चोरी होने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन मालिक का दावा है कि कंपनी के ही कर्मचारियों ने सामान हटाया है. ऐसे में पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में सामान चोरी हुआ है या उसे अधिकृत रूप से हटाया गया है.
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