बक्सर स्कूल कांड : राजकीय शिक्षक पुरस्कार चयन पर उठे सवाल, शिक्षक संगठनों ने लगाया सेटिंग-गेटिंग का आरोप

बक्सर में राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के चयन पर उठे गंभीर सवाल। शिक्षक संगठनों ने सेटिंग-गेटिंग का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

Buxar-Dumraon Student Rape Case : राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित शिक्षकों के नाम को लेकर बक्सर में विवाद खड़ा हो गया है. शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि मध्य विद्यालय नथुनी अहीर के डेरा के प्रधानाध्यापक मो. इमाम अली अंसारी का चयन सेटिंग-गेटिंग के जरिए कराया गया है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

शिक्षक संगठनों ने चयन प्रक्रिया पर उठाये सवाल

नाम नहीं छापने की शर्त पर शिक्षक संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने दावा किया कि पुरस्कार चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गयी. संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि चयन समिति ने राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए सेटिंग-गेटिंग का सहारा लिया. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

सीपीएस स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक की भूमिका पर भी सवाल

संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मो. इमाम अली अंसारी का नाम चयनित कराने में सीपीएस स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. असफाक अंसारी की भूमिका रही है. पदाधिकारियों ने दावा किया कि गत वर्ष मो. असफाक अंसारी अपने एक करीबी रिश्तेदार के माध्यम से राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत हुए थे. हालांकि इस संबंध में लगाए गये आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

बक्सर से तीन शिक्षकों के नाम की भेजी गयी थी अनुशंसा

बताया जा रहा है कि बक्सर जिले से राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए तीन शिक्षकों के नाम की अनुशंसा शिक्षा विभाग को भेजी गयी थी. इनमें मो. इमाम अली अंसारी, कन्हैया प्रसाद राय और दुर्गा मांगे उपाध्याय का नाम शामिल था. शिक्षक संगठनों ने इन नामों के चयन और अनुशंसा की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किये हैं.

उच्चस्तरीय जांच की मांग, डीईओ पर भी उठे सवाल

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाती है तो जिला शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है. संगठन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि पुरस्कार चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच की जानी चाहिए.

आरोपी शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को बचाने का भी लगाया आरोप

शिक्षक संगठनों की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि डुमरांव के मध्य विद्यालय नथुनी अहीर के डेरा से जुड़े मामले में शुरुआत में आरोपी शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को बचाने का प्रयास किया गया. संगठन का कहना है कि मामला प्रमुखता से सामने आने के बाद कार्रवाई की गयी. हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने नहीं दी प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. ऐसे में शिक्षक संगठनों द्वारा लगाये गये आरोपों और पुरस्कार चयन प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है.

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई

राजकीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के चयन को लेकर शिक्षक संगठनों ने गंभीर सवाल उठाये हैं. हालांकि सेटिंग-गेटिंग और चयन प्रक्रिया में कथित भूमिका को लेकर लगाये गये आरोपों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच से नहीं हुई है. ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई किसी जांच या संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.

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By मृत्युंजय सिंह

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