बक्सर: बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर ट्रस्ट के चार साल, चढ़ावे की राशि का हिसाब नहीं; मेलों पर नगर पंचायत खर्च कर रही लाखों-करोड़ों

बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर ट्रस्ट के गठन को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन चढ़ावे की राशि का हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. वहीं, सावन और महाशिवरात्रि मेलों पर नगर पंचायत लाखों खर्च कर रही है. श्रद्धालु सुविधाओं में भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है.

Baba Brahmeshwar Nath Temple: बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर के बेहतर प्रबंधन, विकास और वित्तीय पारदर्शिता के उद्देश्य से ट्रस्ट का गठन हुए करीब चार साल बीत चुके हैं. इसके बावजूद मंदिर को चढ़ावे के रूप में प्राप्त होने वाली राशि का अब तक सार्वजनिक लेखा-जोखा सामने नहीं आया है. स्थानीय श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि सावन की सोमवारी और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर मंदिर में बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है, लेकिन इसकी आय और खर्च का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है.

दूसरी ओर, मंदिर में आयोजित होने वाले सावन और महाशिवरात्रि के मेलों की व्यवस्थाओं पर नगर पंचायत के सरकारी खजाने से लगातार राशि खर्च की जा रही है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब मंदिर को चढ़ावे के रूप में आय प्राप्त होती है, तो मेलों की व्यवस्थाओं का पूरा खर्च नगर पंचायत के बजट से क्यों किया जा रहा है.

चढ़ावे की राशि का लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं

स्थानीय श्रद्धालुओं और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर में सालाना लाखों रुपये का चढ़ावा आता है. सावन और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर दानपेटी में बड़ी राशि जमा होने की बात कही जा रही है. उनका कहना है कि ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर की आय और खर्च का ऑडिट कराकर उसका विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए था, ताकि श्रद्धालुओं को भी इसकी जानकारी मिल सके.

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि मंदिर की आय का उपयोग किस तरह किया जा रहा है और इस राशि का नियंत्रण किसके पास है. चार साल बीतने के बाद भी चढ़ावे की राशि का स्पष्ट हिसाब सामने नहीं आने से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.

मेलों की व्यवस्था पर नगर पंचायत का खर्च

स्थानीय लोगों के अनुसार, महाशिवरात्रि और सावन के मेलों के दौरान साफ-सफाई, टेंट, बैरिकेडिंग, पेयजल, लाइटिंग और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर नगर पंचायत की ओर से राशि खर्च की जाती है. समाजसेवियों का आरोप है कि यदि मंदिर की आय का उपयोग इन व्यवस्थाओं में किया जाता, तो नगर पंचायत की राशि का इस्तेमाल शहर के अन्य विकास कार्यों में किया जा सकता था.

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि ट्रस्ट गठन के बावजूद मंदिर की व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को आज भी कई बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है.

चार साल बाद भी सुविधाओं का इंतजार

ट्रस्ट के गठन के समय मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई गई थी. भव्य शेड, आधुनिक पेयजल व्यवस्था, सुलभ शौचालय और कतार प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत बताई गई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि चार साल बाद भी इन सुविधाओं को लेकर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है.

क्या कहते हैं एसडीएम

एसडीएम राजीव कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है. फिलहाल सावन का महीना चल रहा है, इसलिए श्रावणी मेले की व्यवस्था प्राथमिकता में है. सावन के बाद इस मामले की जांच कराई जाएगी.



प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By सुजीत कुमार ओझा

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >