राजपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों सिर्फ साधारण रोगियों की जांच की जाती है. करोड़ों रुपये की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में विभागवार रोगियों की जांच करने के लिए सभी कमरे बना दिये गये हैं .जिसके लिए अभी तक फिलहाल चिकित्सा प्रभारी डॉ अशोक कुमार ,डॉ सुनील कुमार सिंह, डॉ अंकित कुमार ही रोगियों की जांच करते हैं. इसमें भी चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर अशोक कुमार की ड्यूटी सप्ताह में एक दिन सदर अस्पताल बक्सर में हो जाने से आयुष डॉक्टर ही रोगियों की जांच करते हैं.
19 पंचायतों के 245 गांवों के आते हैं मरीज
इस स्वास्थ्य केंद्र में 19 पंचायत के लगभग 245 गांव के लोग इलाज कराने के लिए आते हैं.सरकार के गाइडलाइन के अनुसार इस अस्पताल में विभागवार रोगियों की नियमित जांच के लिए 15 पद सृजित किए गए हैं .अभी भी 13 डॉक्टरों की आवश्यकता है. डॉक्टर के अभाव में अन्य रोगियों को यहां से इलाज के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है. गांव के ग्रामीणों को बाहर जाने में काफी परेशानी उठाना पड़ता है.डिजिटल मोड में करने के बाद सरकार पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग को भी हाइटेक बना रही है. इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी आधुनिक तरीकों से सुसज्जित किया जा रहा हैं. फिर भी इस मामले में यह अस्पताल अभी बहुत पीछे हैं.
नहीं हैं महिला डॉक्टर व सर्जन
विगत कुछ दिन पूर्व यहां पर विभाग के तरफ से महिला चिकित्सक एवं सर्जन की नियुक्ति की गयी थी. लेकिन इन्हें पुनः कुछ ही दिनों बाद बक्सर सदर अस्पताल भेज दिया गया है.जिससे सभी पद खाली हो गये हैं. हालांकि ओपीडी सेवा के तहत प्रतिदिन लगभग 155 से अधिक रोगियों की जांच की जाती है. महिला डॉक्टर नहीं होने से महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है. महिलाओं को प्रसव के अलावा महिला रोग से संबंधित उन्हें आवश्यक सुझाव व दवा दी जाती है. अस्पताल में रोगियों के लिए तीन एंबुलेंस है. इनका संचालन सही हो रहा है.अस्पताल के सफल संचालन के लिए सभी प्रकार के दवाओं की उपलब्धता है.
जांच की सुविधा का नहीं मिल रहा लाभ
सीएचसी को पूरी तरह से अब आधुनिक करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इसके लिए यहां पर सीबीसी मशीन लगा दी गयी है. जिस मशीन के तहत मलेरिया ,फाइलेरिया, कालाजार, टीवी ,एचबी, डब्ल्यूबीसी सहित 14 प्रकार की जांच की जाती है. इससे रोगियों को दूर जाने के बजाय आसानी से जांच के बाद उन्हें बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है.अन्य रोगियों को बक्सर भेजा जाता है.अथवा निजी क्लीनिक में जाकर जांच कराते हैं.\
चिकित्सा प्रभारी ने डॉक्टरों की कमी की बात स्वीकारी
अस्पताल को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किया जा रहा है. जिसके लिए विभागवार डॉक्टर की मांग की गयी है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखित तौर पर सूचित किया गया है. शीघ्र ही चिकित्सक मिलने पर विभागवार भी रोगियों की जांच की जाएगी.
