Buxar News : मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता जरूरी, आत्महत्या समाधान नहीं : डॉ अनुराधा
मानसिक स्वास्थ्य विकार जैसे कि अवसाद या चिंता हमारे सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने के तरीकों को प्रभावित करते हैं. मानसिक बीमारियों के कई प्रकार हैं.
बक्सर कोर्ट.
मानसिक स्वास्थ्य विकार जैसे कि अवसाद या चिंता हमारे सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने के तरीकों को प्रभावित करते हैं. मानसिक बीमारियों के कई प्रकार हैं. मानसिक स्वास्थ्य विकारों को आमतौर पर उपचार से ठीक किया जा सकता है जिसमें दवा, मनोचिकित्सा, वैकल्पिक उपचार या मस्तिष्क उत्तेजना चिकित्सा शामिल होती है. उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान मनोचिकित्सक डॉ अनुराधा ने उपस्थित पैनल अधिवक्ताओं एवं पैरा लीगल वालंटियर से कहीं. उन्होंने कहा कि व्यावहारिक स्वास्थ्य जिसे मानसिक स्वास्थ्य भी कहा जाता है में व्यक्ति का मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य शामिल होता है यह आपके सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने और दूसरों के साथ बातचीत करने के तरीकों को आकार देता है. आपकी मानसिक स्थिति इस बात को भी प्रभावित करती है कि आप तनाव से कैसे निपटते हैं. यह बचपन से लेकर वयस्कता तक आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में आत्महत्या की घटनाएं तेजी से बढ़ी है इसके पीछे शराब का लत, मानसिक तनाव, उदासीनता आदि कारण हो सकते हैं, लेकिन आत्महत्या से समस्या का समाधान नहीं होता है. उन्होंने कहा कि बहुत लोग यह सोचकर आत्महत्या कर लेते हैं कि उनकी समाज में बेइज्जती होगी, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि उनके मरने के बाद भी उनकी और ज्यादा बेइज्जती होती है, साथ ही परिवार को भी सामाजिक अपमान झेलना पड़ता है. ऐसे में किसी भी कारण या समस्या को लेकर लोगों को घबराना नहीं चाहिए तथा इस संबंध में मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए या अपने करीबी मित्रों से बातचीत जारी रखना चाहिए. इस अवसर पर डॉ अमलेश कुमार, पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव, जितेंद्र कश्यप, भी दत्त, तेज प्रताप सिंह, कंचन कुमारी, मंजू कुमारी, रुकैया, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सहायक दीपेश कुमार श्रीवास्तव, सुनील कुमार आदि के अलावा कई पैनल अधिवक्ता एवं पैरा लीगल वालंटियर उपस्थित थे.
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