कृषि यांत्रिक मेला में 91 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, लगाये गये 21 स्टॉल

किसानों को आधुनिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने एवं कृषि कार्यों में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा बुधवार को बाजार समिति परिसर में कृषि यंत्रीकरण मेला का आयोजन किया गया.

बक्सर. किसानों को आधुनिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने एवं कृषि कार्यों में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा बुधवार को बाजार समिति परिसर में कृषि यंत्रीकरण मेला का आयोजन किया गया. इस मेले में कुल 21 स्टॉलों के माध्यम से 91 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसान नयी तकनीकों से रूबरू हो सकें और खेती को कम लागत व अधिक लाभकारी बना सकें. मेला का उद्घाटन उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार, सहायक भूमि संरक्षण पदाधिकारी चंदन कुमार, सहायक निदेशक प्रक्षेत्र शालिग्राम, आत्मा उपनिदेशक रणधीर कुमार तथा सहायक कृषि यांत्रिकीकरण निदेशक गरिमा झरिया ने संयुक्त रूप से किया. उपविकास आयुक्त निहारिका छवि ने कहा कि यदि किसानों को अपनी आय दोगुनी करनी है तो उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना होगा.आधुनिक यंत्रों से न केवल श्रम की बचत होती है, बल्कि समय पर कार्य होने से उत्पादन बढ़ता है और लागत भी कम होती है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर यंत्रीकरण को अपनाएं. जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि अधिकांश किसान खेती में होने वाली कुल लागत का सही डाटाबेस तैयार नहीं करते, जिसके कारण उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि खेती से उन्हें लाभ हुआ या हानि. यदि किसान परंपरागत तरीके से की गयी खेती और आधुनिक यंत्रों के प्रयोग से की गई खेती का तुलनात्मक डाटा तैयार करें, तो उन्हें वास्तविक लाभ का पता चलेगा. इससे भविष्य की खेती की योजना बनाने में भी मदद मिलेगी. कार्यक्रम में फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया. अधिकारियों ने किसानों को बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है और लाभकारी जीवाणु खत्म हो जाते हैं. सहायक कृषि यांत्रिकीकरण निदेशक गरिमा झरिया ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से वातावरण भी प्रदूषित होता है, जिसका दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है. इसके विकल्प के रूप में फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों के प्रयोग की जानकारी दी गयी. मेले में जुतायी, बुआयी, सिंचायी, पौधा संरक्षण, फसल कटनी, खाद प्रसंस्करण एवं फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित आधुनिक यंत्रों की प्रदर्शनी लगायी गयी. किसानों ने विभिन्न स्टॉलों पर जाकर यंत्रों की कार्यप्रणाली, कीमत, अनुदान एवं उपयोग से होने वाले लाभ की जानकारी ली. इसके अलावा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक किया गया. इस मौके पर सभी कृषि समन्वयक, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, सहायक तकनीकी प्रबंधक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रशिक्षु प्रखंड कृषि पदाधिकारी किसान शामिल रहे.

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Published by: Alok kumar

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