Buxar News: एक डॉक्टर के सहारे 23 हजार 684 लोगों की निर्भर है स्वास्थ्य सेवा

जिले की आबादी लगभग 18 लाख के करीब हैं. जिनके इलाज के लिए जिले में सिविल सर्जन समेत करीब 76 डॉक्टर पदस्थापित है

बक्सर

. जिले की आबादी लगभग 18 लाख के करीब हैं. जिनके इलाज के लिए जिले में सिविल सर्जन समेत करीब 76 डॉक्टर पदस्थापित है. जबकि जिले में सिविल सर्जन समेत कुल 224 डॉक्टरों का पद सृजित है. जिनके सहारे ही जिले के मरीजों की इलाज की सुविधा मिल रही है. वहीं जिले में फिलहाल कुछ डॉक्टर लंबे सयम से गायब है. वहीं इनमें कुछ डॉक्टर अल्पकालिक रूप में प्रतिनियुक्ति पर भी जिला में सेवा दे रहे है. जिले वासियों की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए वर्तमान में जिले में सेवारत है. जिनके सहारे ही जिले की 18 लाख लोगों की स्वास्थ्य सुविधाएं निर्भर है. इस तरह कहा जा सकता है कि 23 हजार 684 लोगों के इलाज करने के लिए जिले में एक डॉक्टर मौजूद है. हांलाकि पूर्व की अपेक्षा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षाकृत वृद्धि हुई है. सदर अस्पताल में पीपीपी मोड में डायलिसिस एवं सीटी स्कैन जैसी महंगी सेवाएं शुरू हो गई है. जिसका लाभ मरीजों को मिल रहा है. डिजिटल एक्सरे की सुविधा भी मरीजों को नि:शुल्क प्राप्त हो रही है. इसके साथ ही सदर अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था को लेकर दो ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है. हालांकि फिलहाल खराब पड़े हुए है. जिसकी मरम्मती के लिए विभाग से प्रयास जारी है. ऐसी स्थिति में जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर होना उनकी मजबूरी बन गई है. वहीं जिले के 18 लाख लोगों के लिए सभी अस्पतालों को मिलाकर 372 के करीब बेड है. जिले में सदर अस्पताल सहीत कुल पीएचसी एवं सीएचसी 13 अस्पताल है. वहीं कुछ एपीएचसी पर भी डॉक्टरों की पदस्थापना के बाद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हो गई है. ऐसी परिस्थिति में स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा पाना काफी कठिन है. जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी है. जिले के सरकारी अस्पताल में भी इमरजेंसी सर्जरी की सुविधा मरीजों को नहीं मिलती है. ऐसी स्थिति में मरीज सदर अस्पताल में सक्रिय दलालों एवं कर्मियों के हाथों फंस जाते हैं. विपरीत परिस्थिति होने के कारण लोगों की हर बाते अच्छी मानकर परिजन सबसे पहले अपने मरीज की जान बचाने के लिए विवश हो जाते है. ऐसी विकट परिस्थिति में जब कोई अनहोनी होती है तो स्वास्थ्य विभाग आनन-फानन में जांच कमेटी बैठाता है. फिर उसकी जांच हवा-हवाई साबित होती है. जिले में काफी संख्या में नीजी अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन भी विभाग के पास है. इससे अलग 350 से भी ज्यादा की संख्या में नीजी अस्पताल गली मुहल्ले में संचालित हो रहे हैं. इन अस्पतालों में मरीजों का भरपूर शोषण किया जाता है. स्वास्थ्य सूत्रों की माने तो यह निजी अस्पताल अपनी कमाई की अच्छी आमदनी स्वास्थ्य विभाग को मुहैया कराता है. जिसके कारण गलत किए जाने के बाद भी न तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी जांच किया जाता है और न कभी कार्रवाई की जाती है.

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