चौसा : मुस्लिम समाज के मुकद्दस पर्व ईद उल फितर की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं. चौसा बाजार में ईद के त्योहार को लेकर बाजार की रौनक देखते ही बन रही है. जून के महीने में तपती गर्मी का कोई असर शहर के बाजारों पर देखने को नहीं मिल रहा है और बड़े जोश के साथ महिलाएं व बच्चे ईद की तैयारियों में मशगूल है.
चाहे वह कपड़े की दुकान हो, ज्वेलरी की दुकान हो, जूते-चप्पल या खाने-पीने के सामानों की दुकान हो, हर जगह काफी भीड़ देखी जा रही है.
जामियां मस्जिद चौसा के ईमाम मौलाना मो. तौकीर ने बताया कि रमजान के पाक महीने में फितरा देने से बरकत मिलती है. रोजा रखने वाले रोजेदार भाइयों को जितना शबाब रोजा रखने से मिलता है उतना ही इफ्तार कराने से मिलता है. रोजे में गरीबों की मदद करने से बरक्कत मिलती है.
इसलिए रोजा रखने वाले रोजेदार को चाहिए कि वह रोजे में नेक काम करे. अल्लाह उन्हें सुकून देगा.
यमराज ने तथास्तु कहा. तब सावित्री ने कहा कि जब पति ही नहीं रहेगें तो मैं पुत्रवती कैसे बनूंगी. इसके बाद यमराज ने सत्यवान की आत्मा को वापस कर दिया. इस दिन पति की पंखे से हवा करने पर उसके जीवन में ठंडक बनी रहती है. बरगद के पेड़ को भी बांस के पंखे से हवा करने की परंपरा है. साथ ही बरगद की पूजा अर्चना के बाद महिलाएं उनसे गले भी मिलती हैं.
