बक्सर : देश में कृषि की धीमी गति को लेकर केंद्र व राज्य की सरकार दोषी है. दोनों सरकार ने केवल जनता को छलने का काम किया है. किसानों की आय दोगुना नहीं करने के पीछे राजनीतिज्ञ एवं सरकार पूरी तरह से दोषी है.
सरकार किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने का दंभ भर रही है, लेकिन सरकार के पास इसे अमली जामा पहनाने को लेकर कोई ठोस मापदंड व विजन नहीं है. ऐसी दशा में केंद्रीय व राज्य सरकार जनता को केवल छलने का कार्य कर सकती है़ किसानों के हालात को नहीं सुधार सकती है.
जबकि कृषि प्रधान देश में किसानों की उपेक्षा कर देश को विकसित कभी नहीं बनाया जा सकता है. देश की प्रगति नहीं की जा सकती है. किसानों के लिए देश व विदेशों में प्रतिनिधित्व करने वाले किसानों के नेता रणजीत सिंह राणा ने लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न सभाओं को संबोधित करते हुए कही.
राणा बक्सर लोकसभा सीट से किसानों की हक के लिए चुनावी मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कूद पड़े है़ं उन्होंने कहा कि सरकार के पास यदि विजन होता तो किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए वर्षों का समय नहीं लगता़ इसे शीघ्र ही विजन से दूर किया जा सकता है़
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसान अब नेताओं के बरगलाने से फंसनेवाले नहीं है़ उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की यदि सरकार की इतनी इच्छा है तो वे केवल कृषि को उद्योग का दर्जा दे दे. कृषि को उद्योग का दर्जा देने मात्र से ही किसानों की आय दोगुनी के बजाय कई गुनी अधिक हो सकती है़
मतदाताओं से अपील करते हुए राणा सिंह ने कहा कि अपने मत से मुझे सहयोग करें. मैं खेत खलिहान में खटकर काम करनेवाले व सभी के पेटों की भूख मिटानेवाले किसानों की आवाज बुलंद करूंगा. यदि आप इस बार चुकते है तो किसानों को एक बार फिर झूठे सरकार व नेता आश्वासनों से छलेंगे.
