थानों में जब्त वाहन खा रहे जंग, जिला प्रशासन बेपरवाह
बक्सर : जिले के थाना समेत ओपी परिसर में वर्षों से जब्त किये गये करोड़ों रुपये के वाहन जंग खाकर बेकार हो रहे हैं. जब्त वाहनों की नीलामी के प्रति जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा है. हर थाना में करीब दो दर्जन से तीन दर्जन वाहन जब्त हैं. शराब बंदी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बक्सर : जिले के थाना समेत ओपी परिसर में वर्षों से जब्त किये गये करोड़ों रुपये के वाहन जंग खाकर बेकार हो रहे हैं. जब्त वाहनों की नीलामी के प्रति जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा है. हर थाना में करीब दो दर्जन से तीन दर्जन वाहन जब्त हैं. शराब बंदी के बाद सबसे ज्यादा चार चक्का व बाइकों को जब्त किया गया है.
अगर इन वाहनों को विभाग नीलाम कर दे तो लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हो जायेगा और विकास मद में कई कार्य हो सकते हैं. जब्त की गयीं हजारों बाइकें व चार पहिया वाहन सड़ गये हैं. इस संबंध में जिला पुलिस ने बताया कि कोर्ट का मामला है. कोर्ट के आदेश पर नीलामी होती है. कोर्ट का आदेश मिला गया है. जिले के करीब सभी थानों, खनन विभाग व वन विभाग के कार्यालयों में हजारों वाहन सड़ रहे हैं. अगर इन्हें नीलाम कर दिया जाये तो करोड़ों रुपये का राजस्व मिल जायेगा.
डीएसपी शैशव यादव ने बताया कि थानों में जब्त वाहनों की नीलामी के लिए वरीय पदाधिकारियों को लिखा गया है. बहुत जल्द वाहनों की नीलामी की जायेगी.
जगह नहीं होने के कारण सड़क तक रखे गये हैं जब्त वाहन : किसी भी थाने के पास इतनी जगह नहीं है कि जब्त वाहनों को परिसर के अंदर सुरक्षित रख सके. नगर थाना और यूपी-बिहार के सीमावर्ती थाना वीर कुंवर सिंह सेतु की हालत यह है कि यहां परिसर के बाहर सड़क और चौक तक जब्त वाहनों को रखा गया है, जिसके कारण अतिक्रमण जैसे हालात देखने को मिलते हैं. इसमें कई वाहन तो बिल्कुल नये हैं. वहीं उत्पाद विभाग द्वारा भी सैकड़ों ट्रकों व लग्जरी गाड़ियों को जब्त किया गया है.
यह है नीलामी का नियम : नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन के छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है. वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है. बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है. न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपका कर या समाचार पत्रों के माध्यम से उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने का प्रावधान है ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके लेकिन जटिल प्रक्रिया होने की वजह से कोई भी थानाध्यक्ष नीलामी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
थाना परिसरों में जब्त वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया जल्द शुरू की जायेगी. एक बार नीलामी की तिथि निकाली जा चुकी है लेकिन नीलामी में एक भी व्यक्ति ने भाग नहीं लिया. बहुत जल्द दूसरी बार नीलामी की तिथि निकाली जायेगी.