हत्या के आरोपितों की रिहाई पर भड़के अधिवक्ता

अधिवक्ता की हत्या के समय भी अनिश्चितकालीन हुई थी हड़ताल बक्सर, कोर्ट : मॉर्निंग कचहरी के पहले ही दिन जो सिविल कोर्ट ने देखा वैसा न तो पहले कभी देखा गया था और न ही सुना गया था. अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा के हत्याकांड का फैसला आने के बाद संघ के अधिवक्ता आक्रोशित हो गये. […]

अधिवक्ता की हत्या के समय भी अनिश्चितकालीन हुई थी हड़ताल

बक्सर, कोर्ट : मॉर्निंग कचहरी के पहले ही दिन जो सिविल कोर्ट ने देखा वैसा न तो पहले कभी देखा गया था और न ही सुना गया था. अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा के हत्याकांड का फैसला आने के बाद संघ के अधिवक्ता आक्रोशित हो गये. आक्रोशित अधिवक्ताओं ने सड़क एवं न्यायालय परिसर में जमकर नारेबाजी की. न्यायालय के अधिवक्ता मृतक अधिवक्ता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे. बताते चलें कि अधिवक्ता पीपी सिन्हा के हत्याकांड की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-6 उदय कुमार उपाध्याय के न्यायालय में किया जा रहा था. जहां विगत शनिवार को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था.
इसको लेकर सोशल मीडिया में काफी घमसान मचा हुआ है. रविवार की शाम नगरवासियों ने एक कैंडल जुलूस निकालकर भी रिहाई का विरोध किया था. सोमवार को न्यायालय सुबह छह बजे खुलने के साथ ही आक्रोशित अधिवक्ताओं ने न्यायपालिका के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की. साथ ही एक विरोध जुलूस न्यायालय से निकालकर ज्योति चौक तक होते हुए पुन: न्यायालय में लाकर समाप्त किया. मामले को लेकर संघ के अध्यक्ष विजय नारायण मिश्रा की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गयी.
बैठक को संबोधित करते हुए महासचिव गणेश ठाकुर ने चार सूत्रीय निर्णय को सर्वसम्मत से पारित किया. जिसमें मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय के बहिष्कार के साथ-साथ एडीजे-6 के न्यायालय का बहिष्कार शामिल रहेगा. साथ ही एडीजे-6 के न्यायालय का बहिष्कार अधिवक्ताओं द्वारा अनिश्चितकालीन किया जायेगा.
मृतक के बच्चे ने टेबल पर चढ़कर दी थी गवाही: अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 12 गवाहों की गवाही दर्ज करायी गयी थी. जिसमें मृतक का पुत्र शिवम की गवाही को भी न्यायालय ने कलम दर्ज किया था. घटना का चश्मदीद गवाह बने मृतक की पत्नी एवं पुत्र की गवाही को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था. शिवम को गवाही के लिए जब न्यायालय में प्रस्तुत किया गया तब छोटा बच्चा होने के कारण उसकी ऊंचाई आड़े आ रही थी. इसके बाद उसे विटनेस बॉक्स में टेबल लगाकर गवाही लिया गया.
शुरू से ही संदेहों में रही पुलिस: अधिवक्ता हत्याकांड में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही. घटना का कारण मृतक अधिवक्ता द्वारा अपनी पुत्री के साथ किये जाने वाले छेड़खानी का विरोध करने को बताया गया था. इसको लेकर दाखिल मुकदमे को उठाने के लिए अभियुक्तों द्वारा दबाव दिया जा रहा था. उक्त मामले को लेकर पुलिस को सूचना दी गयी थी,
लेकिन पुलिस का रवैया उदासीन बना रहा. इस कारण अधिवक्ताओं ने अपने अनशन में पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी का घोर विरोध किया था. न्यायालय ने शनिवार को पारित किये गये अपने आदेश में भी लिखा है कि डॉक्टर ने गवाही में न्यायालय को बताया था कि जब घायल अधिवक्ता पीपी सिन्हा होश में थे तब उन्होंने बयान दिया था. किंतु उस बयान को न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया. यदि अभियोजन पक्ष उक्त बयान को प्रस्तुत करता तो सर्वोत्तम एवं अति विश्वसनीय साक्ष्य होता.
क्या था पूरा मामला
27 नवंबर 2015 को अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा को नगर के सोहनीपट्टी मुहल्ले के मोती मस्जिद के पास गोली मारकर उस समय बुरी तरह घायल कर दिया गया था. जब वह घर से निकलकर न्यायालय जा रहे थे. बाद में इलाज के क्रम में 12 दिनों बाद उनकी मौत हो गयी थी. शुरू से ही विवादों में रहने वाले हत्याकांड को लेकर पूरे बिहार के अधिवक्ताओं ने मुहिम चलाया था. जिसमें बक्सर संघ के अधिवक्ताओं ने दो सप्ताह से लंबी अवधि तक अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की. आंदोलन की उग्ररता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि अधिवक्ताओं ने उस समय आयोजित किये जाने वाले राष्ट्रीय लोक अदालत को भी असफल कर दिया था. जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारी की गयी थी.
क्या कहते हैं अधिवक्ता
वकीलों ने पूर्व में भी इस मामले को लेकर अपने चट्टानी एकता का परिचय दिया था. इस बार भी अधिवक्ता एकजुट होकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे.
शिवजी राय, अधिवक्ता
महासचिव ने कहा कि अधिवक्ताओं पर होने वाले जुल्म को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. अधिवक्ता न्याय की लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलायेंगे.
गणेश ठाकुर,महासचिव

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