बक्सर, कोर्ट : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार पांडेय ने दुष्कर्म के मामले में आरोपित को दोषी पाया है. वहीं एक अन्य अभियुक्त को न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. सजा के बिंदु पर फैसला आगे सुनाया जायेगा. घटना सिमरी थाना कांड संख्या 228 सन 2014 से संबंधित है. चार दिसंबर 2012 को सिमरी थाना क्षेत्र में रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी अपने छोटे भाई के साथ कोचिंग से पढ़ कर वापस लौट रही थी कि रास्ते में नजदीकी रिश्तेदार ने उन दोनों को मंदिर में दर्शन कराने के बहाने मोटरसाइकिल से बक्सर ले आया बाद में किशोरी के भाई को बस पर बैठा कर वापस गांव लौटा दिया.
जिसने घर जाकर सारी घटना को परिजनों को बतायी. किशोरी के अपहरण की जानकारी मिलने के बाद उसके पिता ने अपने रिश्तेदार के घर जाकर खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला था. गौरतलब हो कि अभियुक्त किशोरी का नजदीकी रिश्तेदार (भाई) था. बाद में पुलिस दबिश में लगभग 15 दिनों के बाद किशोरी की बरामदगी की गयी थी पुलिस को दिये गये बयान में उसने बताया कि उसके रिश्तेदार मुरार थाना के नाच आप गांव के रहने वाले हैं मनीष कुमार केसरी ने मंदिर में दर्शन कराने के बहाने बक्सर लाया फिर उसके भाई को वापस घर लौट आने के बाद इटाढ़ी के किसी घर में ले गया था.
जिसमें एक बूढ़ी औरत रहती थी. किशोरी को उक्त घर में लगभग 10 दिनों तक रखा गया तथा इस बीच उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया उक्त मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच एवं 164 का बयान दर्ज कराया गया. दोनों पक्षों को सुनने एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने कांड के अभियुक्त मनीष केसरी को दोषी पाया. वहीं दूसरी तरफ उसके पिता राजेंद्र केसरी को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. इस संबंध में विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि सजा के बिंदु पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा.
