बक्सर/डुमरांव : पछुआ हवा और शीतलहर का कहर जिले में जारी है. ठंड ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से बदल दी है. रात का तापमान आठ डिग्री पहुंच जा रहा है. अब यह लगातार नीचे जाने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है. जैसे-जैसे रात का पारा गिरता जा रहा है. वैसे-वैसे ठिठुरन बढ़ती जा रही है. गर्म कपड़ों में भी ठंडक का एहसास कम नहीं हो रहा. जानकारों के मुताबिक कोहरा कभी भी दमदार दस्तक दे सकता है. शीतलहर का कहर बुधवार को भी जारी रहा.
आठ डिग्री पर पहुंचा पारा, ठिठुरन बढ़ी
बक्सर/डुमरांव : पछुआ हवा और शीतलहर का कहर जिले में जारी है. ठंड ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से बदल दी है. रात का तापमान आठ डिग्री पहुंच जा रहा है. अब यह लगातार नीचे जाने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है. जैसे-जैसे रात का पारा गिरता जा रहा है. वैसे-वैसे ठिठुरन बढ़ती […]

कड़ाके की ठंड के बीच धूप के दर्शन भी नहीं हो रहे हैं. सर्दी बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत बिगड़ने लगी है. दिन में हवा और रात में कड़ाके की ठंड के कारण छोटे बच्चे निमोनिया व कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियों की चपेट में हैं. वहीं बुजुर्गों में अस्थमा और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं.
कोहरे ने लगा दिया है ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक : उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण बुधवार को एक बार फिर से पटना-मुगलसराय रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा. इस रूट से गुजरनेवाली मेल व पैसेंजर ट्रेनों के विलंब से चलने के कारण यात्रियों को परेशानी हुई. वहीं रेलवे ने कोहरे को देखते हुए कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है.
दिल्ली से आनेवाली अधिकतर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से करीब 10 घंटे से लेकर 20 घंटे की देरी से चल रही है. ट्रेनों के विलंब से चलने व ट्रेनों के रद्द कर दिये जाने से इसका असर रेल यात्रियों पर पड़ रहा है. एक दिन के सफर को पूरा करने में यात्रियों को दो से तीन दिनों का समय लग जा रहा है. वहीं ट्रेनों के इंतजार में यात्री घंटों स्टेशन पर ठिठुरते रहे.
प्रशासन पर टिकी गरीबों की नजर : लगातार बढ़ रहे घने कोहरे और पछुआ हवा से गरीबों की परेशानी बढ़ गयी है. असहाय गरीब जैसे-तैसे खुले आसमान के नीचे राते गुजारने पर विवश हैं. इन गरीबों की उम्मीदें सरकार पर टिकी है. पारा लुढ़कने से मौसम दिन-रात सितम ढा रहा है फिर भी प्रशासन इन गरीबों को ठंड से बचाने के लिए अबतक कोई पहल नहीं की है.
हालांकि नप प्रशासन ने कुछ जगहों पर अलाव की व्यवस्था की है, लेकिन वह भी नाकाम साबित हो रहा है. सरकार की ओर से गरीबों को कंबल भी उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. इस मामले में विभागीय सूत्रों का कहना है कि गरीब असहायों के बीच वितरण होनेवाले कंबल की मांग की गयी है. कंबल आने के बाद गरीबों के बीच वितरण किया जायेगा.
थम गयी रोजमर्रे की रफ्तार : कंपकपाती ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. ठंड और गलन से आम लोगों की रोजमर्रे की रफ्तारों पर ब्रेक लग गया. घरों में दुबके लोग चाह कर भी बाहर नहीं निकल पाते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व बच्चों को हो रही है. निजी स्कूलों के बंद होने के बाद भी कोचिंग संस्थानों में बच्चों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. वहीं, महिलाओं को ठंड में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.