कुव्यवस्था. परिसर बना आम रास्ता, फर्राटे भरते हैं वाहन
डुमरांव : अनुमंडलीय अस्पताल की तीसरी आंख बीमार है. इसका इलाज कराने के लिए एक माह पहले हुई रोगी कल्याण समिति की बैठक में प्रस्ताव पर मुहर लगा चुकी है. लेकिन, आज तक अस्पताल में तीसरी आंख कहे जानेवाले सीसीटीवी कैमरे की मरम्मत नहीं हो सकी. इससे अस्पताल में हमेशा सुरक्षा की चिंता बनी रहती है. प्रतिदिन अस्पताल में 100 से 150 मरीजों का आना-जाना लगा रहता है. संसाधन, दवा का अभाव, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को लेकर अस्पताल में पहुंचे मरीज से नोकझोंक होती रहती है. किसी भी अप्रिय स्थिति में सीसीटीवी कैमरे का फुटेज काफी महत्व रखता है. अस्पताल की सुरक्षा को लेकर महज पांच सुरक्षाकर्मी हैं.
इन पर पूरे अस्पताल की सुरक्षा की जवाबदेही है. अस्पताल उपाधीक्षक की मानें, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त फौजी को देनी थी, लेकिन होमगार्ड को भेजा गया. अगर सीधे कहें कि अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे है तो गलत नहीं होगा. अस्पताल परिसर में ऑटो लगा रहता है, मवेशी विचरण करते रहते हैं, प्रसूति विभाग तक पशु पहुंच जाते हैं, अस्पताल परिसर से नंदन जानेवाले और नंदन की ओर से आवागमन करनेवाले साइकिल, बाइक और ऑटो फर्राटे भरते रहते हैं. इससे हमेशा परिसर में दुर्घटना होने का भय बना रहता है.
शौचालय जाम, मरीज व परिजन होते हैं परेशान : अस्पताल के ओपीडी विभाग में मौजूद पुरुष शौचालय में ताला लटका रहता है. आपातकालीन विभाग में स्थित शौचालय जाम पड़ा है. इससे मरीज व उनके परिजनों को अस्पताल परिसर के बाहर खुले में शौच जाने की बाध्यता बनी रहती है.
कर्मियों की कमी : अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण एएनएम को 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है. इससे उन्हें काफी परेशानियों का करना पड़ता है. यहां स्वीकृत पद की अपेक्षा महज छह एएनएम व तीन जीएनएन कार्यरत हैं. वहीं, कर्मियों के अभाव में ब्लड मशीन का अब तक उद्घाटन नहीं हो सका है.
बोले उपाधीक्षक
सीसीटीवी कैमरे की मरम्मत के लिए तकनीशियन को बुलाया गया है. कर्मियों की कमी को लेकर बार-बार जिला मुख्यालय को रिपोर्ट दी जाती है, लेकिन केवल आश्वासन मिलता है. सीएस ने कर्मियों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मी देने का आश्वासन दिया है.
डॉ नागेंद्र भूषण सिंह, अस्पताल उपाधीक्षक
