सात घंटे तक की गयी कोपवां स्थित उनके पैतृक घर में छापेमारी
डुमरांव़ : बक्सर में पहली बार आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने छापेमारी की है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिवहर एमवीआई अमिताभ सिंह के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गयी. इस दौरान टीम को कई महत्वपूर्ण कागजात एवं बेनामी संपत्तियों का पता चला है. पटना से पहुंची ईओयू की टीम ने सात घंटे तक कोपवां स्थित उनके पैतृक घर को खंगाला. जहां से कई कागजातों को जब्त किया है.
आर्थिक अपराध इकाई ने एमवीआई के संपत्ति का ब्योरा ग्रामीणों से भी ली.
छापेमारी के बाद घर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है. घर में टीम को एक तिजोरी भी मिली जिसे खोलने में वह कामयाब नहीं रहे. जिसके बाद उसे भी सील कर दिया गया है. आय से अधिक संपत्ति मामले में आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई अनुमंडल क्षेत्र में पहली बार बताया जाता है. छापेमारी के वक्त घर में ताला बंद था.
जिसे स्थानीय लोगों की मदद से खुलवाया गया. शिवहर के एमवीआई अमिताभ सिंह का पैतृक गांव कोरानसराय थाना क्षेत्र के कोपवां गांव है. 7 अगस्त 2017 को शिवहर में एमवीआई के पद पर योगदान दिया था. इसके पूर्व वे पटना परिवहन विभाग में कार्यरत थे. गांव में बने उनके आलीशान घर में कोई नहीं रहता और गांव का ही एक आदमी इसकी देखरेख करता है. घर के कमरों का ताला तोड़ अंदर के सामान की छानबीन की गयी.
अफसरों ने कहा, अभी कागजी कार्रवाई है शुरू :अचानक आर्थिक अपराध इकाई की हुई छापेमारी से गांव में हड़कंप मच गया. छापेमारी के लिए पटना से छह सदस्यीय टीम कोपवां पहुंची हुई थी. छापेमारी में किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए टीम ने स्थानीय थाना का सहयोग लिया था. कोपवां में छापेमारी डीएसपी अनिल कुमार के नेतृत्व में की गयी थी. टीम में छह लोग शामिल थे.
गांव में करोड़ों की लागत से बनाया जा रहा था मंदिर : शिवहर के एमवीआई अमिताभ कुमार सिंह गांव में करोड़ों की लागत से मंदिर का निर्माण करा रहे हैं. इसको लेकर सारी तैयारियां भी पूरी कर ली गयी है. मूर्ति लाने के लिए ग्रामीणों को प्लेन से राजस्थान हाल के दिनों में ले जाया गया था. अधिकारियों की इस कार्रवाई से गांव में मायूसी पसर गयी है. ग्रामीणों की माने तो स्व. शिव कुमार सिंह की पहचान गांव में एक प्रतिष्ठित किसान के रूप में शामिल है. इनके पुत्र अवधेश कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह और अमिताभ कुमार सिंह नौकरी पेशे से जुड़े हैं. गांव के सामाजिक कार्यों में सहभागिता के साथ लोगो के दुख-दर्द में शामिल होना इस परिवार की परंपरा बनी हुई है.
