सख्ती. जेल से 2016 दिसंबर में पांच कैदी हो गये थे फरार
बक्सर की सेंट्रल जेल में बंद हैं 752 कैदी
बक्सर : सेंट्रल जेल में बंद कैदी अब जेल के अंदर से हुकूमत नहीं चला पायेंगे. क्योंकि बक्सर केंद्रीय कारा में मोबाइल पर रोक लगाने के लिए लंबे समय से चल रही कोशिश नये वर्ष में पूरी हो सकती है. जेल मुख्यालय ने अब सेंट्रल जेल में जैमर लगाने का फैसला लिया है. जेल के अंदर बार-बार मोबाइल फोन के होने के चलते यह कदम उठाया जा रहा है. जेल में बंद एक कैदी की तस्वीर भी वायरल हुई थी. दिसंबर 2016 में पांच कुख्यात कार्डकोर जेल ब्रेक कर भाग गये थे. जेल के अंदर सजा काट रहे अपराधियों ने मोबाइल फोन के इस्तेमाल करके सेंट्रल जेल को इस कदर सुर्खियों में ला दिया कि सरकार ने जेल में जैमर लगाने की योजना तैयार कर ली है.
इसके लिए मोबाइल विशेषज्ञों की एक टीम अगले माह में जेल का दौरा करेगी. पिछले कुछ सालों में सेंट्रल जेल में छापेमारी के दौरान कई बार मोबाइल पकड़ा जा चुका है. जांच में यह भी बात सामने आयी थी कि यहां से कुछ अपराधी जेल से ही अपना गिरोह संचालित करते हैं. कैदियों के फरार होने के बाद तीन वार्डन पर कार्रवाई भी की गयी थी. अब उम्मीद की जा रही है कि जैमर लगने से इस पर लगाम लगेगा.
सर्वे का काम हुआ पूरा : जेल में अपराधियों के साथ अधिकारियों को भी मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है. लेकिन, लगातार हो रही घटनाओं के मद्देनजर सरकार मोबाइल का उपयोग रोकने के लिए जैमर लगाने जा रही है. इस पर पांच करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. यहां करीब 40 एकड़ की जेल की चहारदीवारी के भीतर 16 प्वाइंट पर जैमर लगाने का सर्वे पूरा हो चुका है. देरी है तो बस इंटेलिजेंस से क्लीयरेंस मिलने की. तय हुआ है कि भारत सरकार की अधिकृत कंपनी बीईएल और ईसीआईएल में किसी एक को यह जिम्मा दिया जायेगा. जेल अधिकारी कहते हैं कि यह सुरक्षा का मामला है, ऐसे में रत्ती भर भी कोताही नहीं बरती जा सकती.
एक जैमर की क्षमता 50 मीटर : विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जेल में लगाये जाने वाले एक जैमर की कीमत 25 से 30 लाख रुपये की लागत आयेगी.
एक जैमर करीब 50 मीटर दायरे को कवर करेगा. इसे जेल में छतों व टॉवर पर लगाया जायेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
जेल में समय-समय पर हुई जांच के दौरान अपराधियों के पास से मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. यह गंभीर मामला है. यही वजह है कि जेल में जैमर लगाने का निर्णय लिया गया है. बक्सर जेल को इस प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से पांच कुख्यात कैदी फरार हो गये थे.
विजय अरोड़ा, जेलर ,सेंट्रल जेल बक्सर.
