जिले के चरवाहा स्कूल की जमीन के प्रति प्रशासन उदासीन

जिले में एक अनूठी शैक्षणिक योजना चरवाहा विद्यालय की जमीन आज खाली पड़ी है और उस पर भू-माफियाओं की नजर बताई जा रही है.

बिहारशरीफ. जिले में एक अनूठी शैक्षणिक योजना चरवाहा विद्यालय की जमीन आज खाली पड़ी है और उस पर भू-माफियाओं की नजर बताई जा रही है. प्रशासन की सुस्ती के चलते यह जमीन अब अनपयोगी है.इसकी शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में हुई थी. साल 1992 में इस योजना की घोषणा की गई थी. इसका मकसद था गरीब चरवाहा समुदाय के बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उनके पशुओं का भी ख्याल रखना. योजना के तहत बच्चे अपने पशुओं के साथ स्कूल आते और बच्चे पढ़ाई करते और उनके पशु विद्यालय परिसर में ही चरते. इस तरह बच्चों की पढ़ाई भी हो जाती और परिवार की आय का जरिया (पशु) भी सुरक्षित रहता. इस समय जिले के गिरियक में इस विद्यालय के लिए कृषि विभाग की खाली जमीन का इस्तेमाल किया गया था. इसे चलाने के लिए चार विभागों को जिम्मेदारी दी गई थी. वन विभाग को परिसर में पेड़-पौधे लगाने के लिए. मत्स्य विभाग को विद्यालय में मछली पालन का प्रबंधन, समाज कल्याण विभाग को बच्चों के लिए दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था कराने और चरवाहा विद्यालय योजना की जिम्मेवारी थी. लेकिन आज न तो यहां कोई चरवाहा विद्यालय चल रहा है और न ही कृषि विभाग द्वारा बीज का उत्पादन हो रहा है. सालों से यह जमीन बेकार पड़ी है. इस खाली पड़ी जमीन पर अब भू-माफियाओं की नजर है. क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस खतरे की ओर जिला प्रशासन का ध्यान कई बार आकर्षित कराने की कोशिश की है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इस तरह, एक सामाजिक सरोकार की नेक योजना आज प्रशासनिक उपेक्षा और भू-माफियाओं के कब्जे के खतरे के बीच झूल रही है. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस जमीन का सदुपयोग कब होगा और प्रशासन इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में कब गंभीर दिखेगा.

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By SANTOSH KUMAR SINGH

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