अब तक कुल 1.17 लाख में से केवल 64,618 किसानों की ही हुई फार्मर रजिस्ट्री

जिले के गांव-गांव में कैंप लगाकर एग्री स्टैक परियोजना के तहत चलाया जा रहा फार्मर रजिस्ट्री अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है.

बिहारशरीफ. जिले के गांव-गांव में कैंप लगाकर एग्री स्टैक परियोजना के तहत चलाया जा रहा फार्मर रजिस्ट्री अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है. प्रशासन की ओर से कृषि विभाग, राजस्व विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के सहयोग से यह अभियान 26 जनवरी तक चलाया जाना है, जिसमें किसानों का ऑन-द-स्पॉट फार्मर रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. लेकिन सोमवार तक जिले में कुल मिलाकर महज 36.97 प्रतिशत किसानों का ही फार्मर रजिस्ट्री हो सका है. ऐसे में निर्धारित तिथि तक शत-प्रतिशत किसानों का पंजीकरण होना संभव प्रतीत नहीं हो रहा. जिले में कुल 1 लाख 17 हजार 785 किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है, जिनमें से अब तक केवल 64,618 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पायी है. इन सभी योजना से लाभुक किसानों का किसी भी हालत में फार्मर रजिस्ट्री करनी है. आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक बेन अंचल फार्मर रजिस्ट्री में सबसे आगे है, जहां लक्ष्य के 69.16 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण हो चुका है. वहीं सिलाव अंचल इस अभियान में फिसड्डी साबित हो रहा है, जहां रजिस्ट्री की रफ्तार बेहद धीमी है. जिले में एग्री स्टैक परियोजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री के दौरान सबसे अधिक समस्याएं जमीन से संबंधित सामने आ रही हैं. कई किसानों की जमीन रसीद में रकबा शून्य दर्ज है, जबकि कुछ मामलों में जमीन रसीद में अंकित नाम और किसान पंजी में दर्ज नाम के शब्दों और स्पेलिंग में अंतर है. इसके कारण पोर्टल पर किसानों का विवरण प्रदर्शित नहीं हो पा रहा है. इसके अलावा बड़ी संख्या में बुजुर्ग किसानों का बायोमैट्रिक सत्यापन फेल हो रहा है, जिससे उन्हें बिना पंजीकरण के ही लौटना पड़ रहा है. जमीन रसीद और आधार कार्ड में अंकित नाम में अंतर होने के कारण फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर कई किसानों का नाम सूची में दिखाई नहीं दे रहा है. इसके अलावा, आये दिन नई-नई तकनीकी समस्याएं सामने आने से सीएससी संचालकों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. देवबिगहा निवासी एवं सीएससी संचालक शिशुकांत कुमार का आरोप है कि नाजायज कमाई के लालच में कई अंचलों में कर्मी जान-बूझकर जमीन का विवरण गलत ऑनलाइन दर्ज करते हैं और बाद में सुधार कराने आए रैयतों से मनमानी वसूली की जाती है. यही तरीका अब फार्मर रजिस्ट्री अभियान में किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. सीएससी संचालक रौशन कुमार बताते हैं कि वर्तमान में अधिकांश किसानों का रजिस्ट्रेशन छोटी-छोटी तकनीकी और दस्तावेजी गलतियों के कारण अटक जा रहा है. कहीं आधार और जमीन रसीद में नाम की स्पेलिंग अलग है, कहीं खसरा या रकबा शून्य है. ऐसे मामलों में किसानों का डेटा पोर्टल पर नहीं दिखता और उन्हें बिना फार्मर रजिस्ट्री के ही वापस लौटना पड़ता है. 15 रुपये शुल्क में भी नहीं निकल रहा खर्च : सीएससी संचालक विक्की कुमार बताते हैं कि प्रशासन की ओर से प्रति किसान 15 रुपये लेने का निर्देश है, लेकिन पूरे दिन में 10 से 15 फार्मर रजिस्ट्रेशन भी मुश्किल से हो पा रहा है. ऐसे में बिजली, इंटरनेट और कर्मियों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है. ऊपर से प्रिंट कर रजिस्ट्री का कागज किसानों को देना होता है. अधिकांश कैंपों में पहुंचे किसानों का कहना है कि राजस्व कर्मियों की मनमानी के कारण फार्मर रजिस्ट्री अभियान लगभग ठप हो गया है. जमीन के कागजात सुधारने के लिए परिमार्जन प्रक्रिया में महीनों का समय लग रहा है और कई जगहों पर अंचल कर्मी दलालों के माध्यम से अवैध राशि की मांग कर रहे हैं. कुल मिलाकर, जमीन संबंधी गड़बड़ियां, तकनीकी खामियां और प्रशासनिक उदासीनता के कारण एग्री स्टैक फार्मर रजिस्ट्री अभियान अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है. यदि इन समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं हुआ, तो 26 जनवरी तक शत-प्रतिशत किसानों का पंजीकरण महज एक लक्ष्य बनकर ही रह जायेगा. 19 जनवरी तक का अंचलवार किसानों की संख्या, फार्मर रजिस्ट्री और प्रतिशत में उपलब्धि अंचल किसान फार्मर रजिस्ट्री प्रतिशत कतरीसराय 3263 1454 44.56 प्रतिशत राजगीर 5358 2001 37.35 प्रतिशत करायपरसुराय 4453 2328 52.28 प्रतिशत थरथरी 5671 3731 48.16 प्रतिशत बिंद 6020 2694 44.75 प्रतिशत परवलपुर 4353 1768 40.62 प्रतिशत सिलाव 11495 3216 27.98 प्रतिशत सरमेरा 7699 3151 40.93 प्रतिशत चंडी 9114 3752 41.17 प्रतिशत गिरियक 9452 3955 41.84 प्रतिशत बेन 4319 2987 69.16 प्रतिशत हिलसा 9255 4335 46.84 प्रतिशत अस्थावां 11251 3667 32.59 प्रतिशत बिहार 12891 4454 34.55 प्रतिशत एकंगसराय 10574 3409 32.24 प्रतिशत नगरनौसा 5288 2748 51.97 प्रतिशत नूरसराय 17774 3805 21.41 प्रतिशत हरनौत 10363 4138 39.93 प्रतिशत रहुई 12881 3614 28.06 प्रतिशत इस्लामपुर 13311 4411 33.14 प्रतिशत टोटल 174785 64618 36.97 प्रतिशत राजस्व महा अभियान का भुगतान लंबित सीएससी संचालक ने जतायी नाराजगी, परिमार्जन शिविर से बनायी दूरी सिलाव प्रखंड के नियामत नगर धरहरा निवासी सीएससी संचालक रविकांत प्रसाद ने राजस्व महा अभियान के तहत किए गए कार्यों के भुगतान को लेकर प्रशासन से शिकायत की है. उन्होंने डीएम-सह-शिविर के नोडल पदाधिकारी, राजस्व अधिकारी एवं अंचल अधिकारी को पत्र लिखकर बताया है कि पिछले राजस्व महा अभियान के दौरान नौ दिनों तक शिविर में योगदान देने के बावजूद अब तक सीएससी के माध्यम से भुगतान नहीं किया गया है. रविकांत प्रसाद ने अपने आवेदन में कहा है कि शिविर के दौरान उन्होंने कंप्यूटर, प्रिंटर सहित अन्य संसाधनों के साथ लगातार नौ दिनों तक सेवा दी, लेकिन निर्धारित मेहनताना अब तक लंबित है. इसी कारण उन्होंने आगामी परिमार्जन शिविर में शामिल न होने का निर्णय लिया है. आवेदन में उन्होंने अपने सीएससी आईडी नंबर के साथ राजस्व महा अभियान में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण भी संलग्न किया है. उन्होंने बताया कि सिर्फ वही नहीं, बल्कि उनके जैसे कई अन्य सीएससी संचालक भी इ-लाभार्थी, इ-केवासी समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं में लगातार कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें समय पर अथवा पूरा भुगतान नहीं मिल पा रहा है. सीएससी संचालक ने प्रशासन से शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >