Rajgir Thai Delegation : राजगीर के पर्यटन स्थलों की खूबसूरती और ऐतिहासिक विरासत अब थाईलैंड के पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी. बिहार पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट के तहत बिहार भ्रमण पर आए थाईलैंड के 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का अगला पड़ाव राजगीर है. बोधगया में महाबोधि मंदिर के दर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल 21 सितंबर को राजगीर नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज समेत प्रमुख स्थलों का भ्रमण करेगा.
राजगीर के पर्यटन स्थलों का करेगा भ्रमण
थाईलैंड से आया 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 21 सितंबर को राजगीर पहुंचेगा. यहां दल राजगीर नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज का भ्रमण करेगा. इसके साथ ही राजगीर के विश्व शांति स्तूप, वेणुवन और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों का भी अवलोकन प्रस्तावित है.
नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज रहेगा आकर्षण का केंद्र
राजगीर नेचर सफारी और ग्लास ब्रिज बिहार के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल हैं. थाई प्रतिनिधिमंडल के दौरे में इन दोनों स्थलों को विशेष रूप से शामिल किया गया है. इससे विदेशी पर्यटकों को राजगीर के प्राकृतिक पर्यटन और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा.
विश्व शांति स्तूप और वेणुवन भी जाएगा दल
राजगीर प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल विश्व शांति स्तूप और वेणुवन का भी भ्रमण करेगा. बौद्ध धर्म से जुड़े इन स्थलों का राजगीर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान में विशेष महत्व है. थाईलैंड से आए प्रतिनिधिमंडल के लिए इन स्थलों का भ्रमण बौद्ध विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुभव होगा.
बोधगया में महाबोधि मंदिर का किया दर्शन
राजगीर पहुंचने से पहले प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को बोधगया स्थित विश्वप्रसिद्ध महाबोधि मंदिर का दर्शन किया. पवित्र बौद्ध परिपथ की यात्रा पर आए सदस्यों ने मंदिर में प्रार्थना की और भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली के आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया.
डूंगरेश्वरी पहाड़ी और सुजाता मंदिर भी देखा
बोधगया प्रवास के दौरान थाई प्रतिनिधिमंडल ने डूंगरेश्वरी पहाड़ी, सुजाता मंदिर और सुजाता स्तूप का भी भ्रमण किया. इसके अलावा थाई मंदिर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संग्रहालय और 80 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा का अवलोकन किया.
महाबोधि मंदिर की शांति ने किया प्रभावित
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बोधगया की यात्रा को अविस्मरणीय अनुभव बताया. भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली पर पहुंचना उनके लिए आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा. महाबोधि मंदिर परिसर के शांत और आध्यात्मिक वातावरण ने भी थाई अतिथियों को आकर्षित किया.
यूनेस्को विश्व धरोहर है महाबोधि मंदिर
बोधगया का महाबोधि मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. ऐसी ही बौद्ध विरासत और ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर बिहार पर्यटन विभाग विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा कार्यक्रम तैयार कर रहा है.
बिहार पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की पहल
पर्यटन विभाग के विशेष सचिव सह पर्यटन निदेशक उदयन मिश्रा ने बताया कि राज्य में बौद्ध परिपथ से जुड़े स्थलों के विकास, प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि थाईलैंड के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा बिहार की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने में सहायक होगा.
भारत-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगा विस्तार
थाई प्रतिनिधिमंडल की बिहार यात्रा को भारत और थाईलैंड की साझा बौद्ध विरासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बोधगया से शुरू हुई यात्रा राजगीर और नालंदा के बाद वैशाली और पटना तक जाएगी. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को बिहार की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य से परिचित कराया जाएगा.
राजगीर के बाद नालंदा जाएगा प्रतिनिधिमंडल
राजगीर भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल नालंदा जाएगा. यहां विश्व धरोहर स्थल प्राचीन नालंदा महाविहार का अवलोकन करेगा. इसके बाद राजगीर में विश्व शांति स्तूप, वेणुवन और अन्य प्रमुख स्थलों के भ्रमण का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है.
वैशाली और पटना भी कार्यक्रम में शामिल
यात्रा के अगले चरण में प्रतिनिधिमंडल वैशाली के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेगा. इसमें रेलिक स्तूप, विश्व शांति स्तूप और कोल्हुआ स्थित अशोक स्तंभ शामिल हैं. यात्रा के अंतिम चरण में पटना में स्थानीय पर्यटन हितधारकों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी.
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