Nalanda News : नालंदा जिला अधिवक्ता संघ के वरीय एवं प्रतिष्ठित अधिवक्ता राकेश कुमार (पंजीकरण संख्या-671/1992) के आकस्मिक निधन से पूरे न्यायिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके निधन की सूचना मिलते ही अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. लंबे समय तक अधिवक्ता संघ से जुड़े रहे राकेश कुमार अपनी कानूनी दक्षता, सरल स्वभाव और सौम्य व्यवहार के कारण अधिवक्ताओं के बीच विशेष सम्मान रखते थे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 9 जुलाई 2026 की रात करीब 11:30 बजे उन्हें अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) आया. परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके निधन की खबर शुक्रवार सुबह फैलते ही नालंदा जिला अधिवक्ता संघ और न्यायालय परिसर में शोक का माहौल छा गया.
अधिवक्ता समाज के लिए अपूरणीय क्षति: महासचिव
नालंदा जिला अधिवक्ता संघ के महासचिव अचिंत्य कुमार ने आधिकारिक शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि राकेश कुमार का निधन अधिवक्ता समाज के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने कहा कि दिवंगत अधिवक्ता ने अपने लंबे विधिक जीवन में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा अधिवक्ता समाज के हितों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनका व्यवहार सदैव सहयोगपूर्ण और प्रेरणादायक रहा.
दिवंगत अधिवक्ता को श्रद्धांजलि देने के लिए 10 जुलाई 2026 को दोपहर 1:40 बजे नालंदा जिला अधिवक्ता संघ के ब्लॉक संख्या-04 स्थित मुख्य सभागार में विशेष शोक-सभा आयोजित की गई. सभा में संघ के पदाधिकारियों, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित हुए. सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.
शोक-सभा में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
शोक-सभा के दौरान वक्ताओं ने राकेश कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ अधिवक्ता पेशे की गरिमा को बनाए रखा. उनके मार्गदर्शन से अनेक युवा अधिवक्ताओं को सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला. अधिवक्ता संघ ने दिवंगत अधिवक्ता के शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिजनों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें. राकेश कुमार के निधन से नालंदा का न्यायिक जगत एक अनुभवी, विद्वान और सम्मानित अधिवक्ता से वंचित हो गया है.
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