महिलाओं को घरेलू हिंसा और अन्य प्रताड़ना से बचाने के लिए सदर अस्पताल परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर तक हर माह औसतन 12 से 18 महिलाएं सहायता के लिए पहुंच रही हैं. इनमें आठ से नौ मामले घरेलू हिंसा से जुड़े होते हैं. इसके बावजूद जरूरतमंद महिलाओं के बीच सेंटर की सुविधाओं और यहां मिलने वाली सहायता को लेकर जागरूकता की कमी सामने आ रही है.
वर्ष 2019 से संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर प्रताड़ित महिलाओं को एक ही जगह पर कानूनी, चिकित्सकीय और मनो-सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ पति-पत्नी के बीच समन्वय स्थापित कर मामले के समाधान का प्रयास कर रहा है. सेंटर में शिकायत दर्ज कराने से लेकर एफआईआर, काउंसिलिंग और सुलह कराने तक की सुविधा उपलब्ध है. खासकर दुष्कर्म, छेड़छाड़ और यौन शोषण जैसे मामलों में मेडिकल जांच के लिए पीड़िता को अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता.
घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले
सखी वन स्टॉप सेंटर की स्थापना से अब तक 680 मामले दर्ज किए गये हैं. इनमें घरेलू हिंसा के 430, दहेज हत्या के चार, दहेज प्रताड़ना के 17, द्वितीय विवाह के 26, यौन शोषण के दो, बाल विवाह का एक और अन्य 198 मामले शामिल हैं.
इनमें से 630 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. निष्पादित मामलों में घरेलू हिंसा के 400, दहेज हत्या के चार, दहेज प्रताड़ना के 16, द्वितीय विवाह के 21, यौन शोषण के दो, बाल विवाह का एक और अन्य 185 मामले शामिल हैं. सेंटर के अनुसार मामलों के निष्पादन में करीब 90 प्रतिशत सफलता मिल रही है.
50 मामले अब भी लंबित
वर्तमान में सेंटर में कुल 50 मामले लंबित हैं. इनमें घरेलू हिंसा के 30, दहेज प्रताड़ना का एक, द्वितीय विवाह के सात और अन्य 12 मामले शामिल हैं. आंकड़े बताते हैं कि सेंटर में पहुंचने वाले मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी घरेलू हिंसा की है.
महिला थाना और फैमिली कोर्ट में अधिक मामले
महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए महिला थाना और फैमिली कोर्ट का भी सहारा लिया जा रहा है. औसतन हर माह महिला थाना में 22 से 28 और फैमिली कोर्ट में 12 से 16 मामले पहुंच रहे हैं. इसके मुकाबले वन स्टॉप सेंटर पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या कम है.
ऐसे में जरूरतमंद महिलाओं तक सेंटर की सुविधाओं की जानकारी पहुंचाना बड़ी चुनौती है. सेंटर की एकीकृत सेवाओं के बारे में व्यापक जागरूकता होने से प्रताड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर कई तरह की सहायता मिल सकती है.
पहले समाहरणालय में चलती थी महिला हेल्पलाइन
सखी वन स्टॉप सेंटर शुरू होने से पहले महिला हेल्पलाइन का संचालन समाहरणालय परिसर से किया जाता था. पीड़ित महिलाओं को मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल जाना पड़ता था, जिससे कई बार मामला सार्वजनिक होने की आशंका रहती थी.
इसी परेशानी को देखते हुए वर्ष 2019 में सदर अस्पताल परिसर में सखी वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत की गयी. अब शिकायत, मेडिकल जांच, एफआईआर, काउंसिलिंग और मामले के समाधान की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं.
चालू वित्तीय वर्ष में 110 मामले दर्ज
वर्तमान वित्तीय वर्ष में सेंटर में कुल 110 मामले दर्ज किये गये हैं. इनमें घरेलू हिंसा के 72, दहेज प्रताड़ना के तीन, द्वितीय विवाह के 14 और अन्य 21 मामले शामिल हैं.
जनवरी माह में 13 मामले दर्ज किये गये, जिनमें नौ घरेलू हिंसा और तीन अन्य मामलों के थे.
व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत
सखी वन स्टॉप सेंटर में अब तक पहुंचे मामलों के आंकड़े बताते हैं कि घरेलू हिंसा महिलाओं के सामने बड़ी समस्या बनी हुई है. वहीं, महिला थाना और फैमिली कोर्ट की तुलना में सेंटर पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या कम है.
जरूरत इस बात की है कि सखी वन स्टॉप सेंटर की सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो, ताकि घरेलू हिंसा और अन्य प्रताड़ना की शिकार महिलाएं थाने या अदालत तक जाने से पहले उपलब्ध एकीकृत सहायता का लाभ उठा सकें.
