Rajgir Sports Science Workshop 2026 Updates : बिहार की ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी राजगीर से इस वक्त देश के खेल जगत को पूरी तरह चौंका देने वाली और बिहार को गौरवान्वित करने वाली एक बेहद बड़ी व सुखद खबर सामने आ रही है. राज्य में खेलों के वैज्ञानिक विकास और जमीनी स्तर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को ओलंपिक स्तर तक पहुंचाने के महा-संकल्प के साथ राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में दो दिवसीय ‘स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप-2026’ का ऐतिहासिक शुभारंभ हुआ है. बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) द्वारा आयोजित इस अनूठी कार्यशाला के जरिए बिहार ने एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जो अब तक देश का कोई दूसरा राज्य नहीं कर सका था.
बना देश का नंबर वन
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने इस गौरवशाली उपलब्धि की लाइव पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि अपने खेल प्रशिक्षकों (कोचों) को आधुनिक खेल विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धतियों से लैस करने के लिए इस प्रकार की ‘स्पोर्ट्स साइंस कार्यशाला’ आयोजित करने वाला बिहार पूरे देश का पहला राज्य बन गया है. 18 और 19 जून तक चलने वाली इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों के दैनिक प्रशिक्षण को एक मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करना है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का झंडा गाड़ सकें. उद्घाटन सत्र में बिहार खेल विश्वविद्यालय के कुलपति शिशिर सिन्हा एवं रजिस्ट्रार रजनीकांत ने देश भर से आए मेहमानों का स्वागत किया.
चोट से बचाव का फॉर्मूला
कार्यशाला के पहले दिन का मुख्य विषय ‘एथलीट हेल्थ, रिकवरी एवं Human Performance’ रखा गया. भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के स्पोर्ट्स विज्ञान विभाग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा कि आधुनिक खेल विज्ञान खिलाड़ियों को सिर्फ मेडल जीतना नहीं सिखाता, बल्कि खेल के दौरान लगने वाली गंभीर चोटों की रोकथाम और उससे जल्दी रिकवरी (पुनर्वास) में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. वहीं पूर्व स्पोर्ट्स साइंस हेड डॉ. पूर्णिमा रमन ने बताया कि फिजियोथेरेपी की मदद से कैसे खिलाड़ी लंबे समय तक मैदान पर टिके रह सकते हैं.
स्पेशल डाइट का सीक्रेट
इसके साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की मुख्य पोषण विशेषज्ञ डॉ. आराधना शर्मा ने खिलाड़ियों के खान-पान के बड़े सीक्रेट्स लाइव साझा किए. उन्होंने बताया कि हर खेल और खिलाड़ी की शारीरिक बनावट के हिसाब से उसका डाइट प्लान बिल्कुल अलग होना चाहिए. एसएआई की हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डॉ. शुभ्रा चटर्जी ने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण अब लाइव ट्रैकिंग के जरिए खिलाड़ियों की क्षमता बढ़ा रहे हैं.
कार्यशाला के दूसरे दिन ‘परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन और हाई-परफॉर्मेंस साइंस’ के तहत डॉ. साजू जोसेफ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, डॉ. गुनीत इंद्रजीत कौर मानसिक तनाव प्रबंधन और डॉ. रजनी कुमार स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स पर कोचों को स्पेशल ट्रेनिंग देंगे. बिहार खेल विभाग का मानना है कि यह हाई-टेक शुरुआत बिहार के खिलाड़ियों को देश के मेडल तालिका में सबसे ऊपर ले जाने का काम करेगी.
