Rajgir Malmas Mela(रामविलास): बिहार के प्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और वीवीआईपी पर्यटकों को वर्ल्ड-क्लास आवासीय सुविधा देने के दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं. शहर के स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई महत्वाकांक्षी ‘वीवीआईपी टेंट सिटी’ परियोजना पूरी तरह फ्लॉप हो गई है. मेला अवधि के दौरान यह आलीशान टेंट सिटी मेहमानों के अभाव में वीरान पड़ी रही. आलम यह है कि मेला शुरू होने के पूरे 15 दिनों बाद तक प्रशासन यह तय ही नहीं कर पाया कि इसका किराया कितना रखना है, जिसका खामियाजा अब सरकार को भुगतना पड़ रहा है.
26 अत्याधुनिक कॉटेज तैयार, पर सुविधाओं का लुत्फ उठाने वाला कोई नहीं
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) द्वारा निर्मित इस भव्य टेंट सिटी में कुल 26 हाई-टेक कॉटेज बनाए गए हैं. प्रत्येक कॉटेज के भीतर वातानुकूलित (AC) कमरे, शुद्ध पेयजल, आलीशान संलग्न शौचालय (अटैच्ड वाशरूम), आरामदायक पलंग, सोफा सेट सहित तमाम आधुनिक सुख-सुविधाएं दी गई हैं. इतनी बेहतरीन व्यवस्था होने के बावजूद यहाँ पर्यटकों की संख्या शून्य के बराबर है. सारे कॉटेज खाली पड़े हैं और रिसेप्शन काउंटर पर सन्नाटा पसरा हुआ है.
प्रशासनिक सुस्ती पड़ी भारी: 15 दिन बाद तय हुआ ₹1000 किराया, तब तक मेला खत्म
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, टेंट सिटी का निर्माण कार्य तो समय पर पूरा हो गया था और शुरुआत में कई अमीर श्रद्धालु यहाँ ठहरने की इच्छा लेकर पहुंचे भी थे. लेकिन उस समय तक न तो आवास का शुल्क निर्धारित था और न ही बुकिंग की कोई प्रक्रिया चालू थी, जिसके कारण इच्छुक लोगों को निराश होकर होटलों का रुख करना पड़ा.
मलमास मेला शुरू होने के करीब आधा समय बीत जाने के बाद, 31 मई को आखिरकार प्रशासन की नींद खुली और प्रत्येक कॉटेज का किराया ₹1000 प्रतिदिन तय किया गया. 1 जून से आधिकारिक बुकिंग शुरू की गई, लेकिन तब तक मेला अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका था. नतीजतन, 5 जून तक केवल 5 कॉटेज की ही बुकिंग हो सकी है, जिससे विभाग को महज ₹5000 की मामूली आमदनी हुई है.
कमाई सिर्फ 5 हजार और बिजली-AC का बिल लाखों में, प्रचार-प्रसार भी फेल
टेंट सिटी के रिसेप्शन काउंटर से मिली जानकारी के मुताबिक, बुकिंग के संचालन के लिए नगर परिषद के कर्मचारियों को तैनात किया गया है. हैरानी की बात यह है कि कॉटेज खाली होने के बावजूद अंदर लगे हैवी वातानुकूलित उपकरण (AC), पानी के पंप और हाई-वोल्टेज लाइटिंग चौबीसों घंटे चालू रखी जा रही है. इससे रोजाना का मेंटेनेंस खर्च और बिजली बिल लगातार बढ़ रहा है, जबकि आमदनी अठन्नी भी नहीं है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि टेंट सिटी के निर्माण के बाद पर्यटन विभाग ने इसका कोई डिजिटल या जमीनी प्रचार-प्रसार नहीं किया, जिससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को इस सुविधा की भनक तक नहीं लगी. समय रहते सही फैसले न लेने के कारण लाखों रुपये की यह वीवीआईपी परियोजना फिलहाल “आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया” वाली कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर रही है.
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