राजगीर मलमास मेला में भिक्षावृत्ति निवारण योजना के दावों की खुली पोल, प्रचार के बीच कुंड गेट पर कटोरा लेकर खड़े दिखे नौनिहाल

Malmas Mela 2026: राजगीर मलमास मेला 2026 में सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद राजगीर कुंड के मुख्य गेट पर बच्चों और बुजुर्गों की लंबी कतार भीख मांगते हुए देखी जा सकती है. इस स्थिति से शिक्षा और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सरकारी कानूनों की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

Malmas Mela 2026(कंचन कुमार): राजगीर मलमास मेला 2026 अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है. एक माह तक चलने वाले इस ऐतिहासिक व धार्मिक मेले के आठ दिन बीत चुके हैं और अब देश के दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगातार बढ़ने लगी है. मेला क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाकर सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. लोगों को जागरूक करने के लिए बैनर, पोस्टर और पंपलेट भी बांटे जा रहे हैं. इन्हीं स्टॉलों में सामाजिक सुरक्षा कोषांग का भी एक वीआईपी काउंटर लगाया गया है, जहां मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना सहित समाज कल्याण विभाग की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का जोर-शोर से प्रचार-प्रसार हो रहा है. लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. विडंबना यह है कि बड़े-बड़े दावों और प्रचार के बावजूद राजगीर ब्रह्मकुंड के मुख्य गेट के बाहर बड़ी संख्या में भिखारी खुलेआम भीख मांगते नजर आ रहे हैं.

कुंड गेट पर मासूम बच्चे और बुजुर्ग मांग रहे भीख, सरकारी दावों पर उठे सवाल

राजगीर कुंड के आसपास सुबह से लेकर देर शाम तक भिखारियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. इनमें लाचार बुजुर्गों के साथ कई किशोर और किशोरियां भी शामिल हैं, जो हाथों में कटोरा और थाली लेकर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं से दो-दो रुपये की भीख मांगते दिख रहे हैं. स्थानीय प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि कई बच्चे जिनकी उम्र स्कूल में ककहरा सीखने की है, वे यहां भीख मांगने को मजबूर हैं. इस नजारे से केंद्र व राज्य सरकार के ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009’ और ‘खाद्य सुरक्षा कानून 2013’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का साफ कहना है कि जब सरकारी दावों में बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ने की बातें कही जा रही हैं, तब इस विश्व प्रसिद्ध मेला क्षेत्र में बच्चों का भीख मांगना प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है.

राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी योजना की चर्चा, पर धरातल पर सब बेअसर

गौरतलब है कि बिहार सरकार ने वर्ष 2008-09 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विशेष पहल पर ‘मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना’ की शुरुआत की थी. यह योजना समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित की जाती है. राज्य सरकार का दावा रहा है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है. इस मॉडल की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई थी और केंद्र सरकार ने भी इसे अन्य राज्यों में लागू करने की दिशा में पहल की थी.

योजना के तहत महिला भिक्षुओं के लिए ‘शांति कुटीर’ और पुरुषों के लिए ‘सेवा कुटीर’ जैसे पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. बिहारशरीफ में भी ऐसे केंद्र बनाए गए हैं, जहां रहने वाले लोगों को मुफ्त भोजन, कपड़े, बिस्तर और दवाइयां उपलब्ध कराने का सख्त प्रावधान है. इसके साथ ही मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार लोगों के इलाज और काउंसलिंग की भी व्यवस्था की गई है. लेकिन मलमास मेले की इस तस्वीर ने तमाम विभागीय प्रबंधों पर पानी फेर दिया है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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