Nalanda News: जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत ओंदा गांव के समीप गुरुवार की देर रात अचानक जमींदारी बांध का तटबंध टूट गया. बांध टूटने से भारी मात्रा में पानी ओंदा पंचायत के रिहायशी इलाकों और निचले भू-भागों में तेजी से फैल गया. अचानक आई इस जल-प्रलय से ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई और लोग अपने सामान व मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए. कई मुख्य रास्ते और संपर्क मार्ग जलमग्न हो जाने के कारण आवागमन बुरी तरह बाधित हो गया है.
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने मोटर बोट से किया बाढ़ग्रस्त इलाकों का मुआयना
शुक्रवार को नालंदा के जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ओंदा पंचायत पहुंचे. उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मोटर बोट पर सवार होकर जलमग्न बस्तियों और टूटे हुए बांध का स्थलीय निरीक्षण किया. सांसद ने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी कठिनाइयां सुनीं और मौके पर मौजूद तकनीकी पदाधिकारियों को क्षतिग्रस्त तटबंध की अविलंब मरम्मत करने तथा जलनिकासी के प्रभावी उपाय सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया.
डीएम उदिता सिंह और एसपी हृदय कांत ने संभाला मोर्चा
हालात की गंभीरता को देखते हुए नालंदा की जिलाधिकारी (DM) उदिता सिंह और पुलिस अधीक्षक (SP) हृदय कांत प्रशासनिक लश्कर के साथ ओंदा पहुंचे. अधिकारियों ने जमींदारी बांध के टूटे हिस्से का मुआयना किया और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अभियंताओं को युद्धस्तर पर बालू की बोरियां (Sandbags) डालकर बांध बांधने का निर्देश दिया. निरीक्षण के दौरान डीडीसी, बिहारशरीफ एसडीएम, अस्थावां के बीडीओ, सीओ और स्थानीय थानाध्यक्ष सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे.
राहत सामग्री पहुंचाने और जलनिकासी के त्वरित निर्देश
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने जिला प्रशासन से कहा कि जलजमाव के कारण किसी भी ग्रामीण को दाने-पानी या चिकित्सा की समस्या नहीं होनी चाहिए. उन्होंने प्रभावित परिवारों तक तत्काल पॉलीथिन शीट, सूखा राशन, शुद्ध पेयजल और मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने को कहा. वहीं, डीएम उदिता सिंह ने आश्वस्त किया कि बांध की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है और जल संसाधन विभाग की टीम जलस्तर की सतत निगरानी कर रही है.
ग्रामीणों ने की स्थायी तटबंध निर्माण की मांग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जमींदारी बांध के जर्जर होने के कारण प्रतिवर्ष जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व सरकार से मांग की है कि पानी उतरने के बाद इस तटबंध का स्थायी व पक्का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में फसलों और जान-माल के नुकसान से बचा जा सके.
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