राजगीर में 21-22 सितंबर को राष्ट्रीय परिसंवाद, विकसित भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर होगा मंथन

नालंदा विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास मिलकर 21-22 सितंबर को 'विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका' पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन कर रहे हैं। देश भर के शिक्षाविद और विद्वान इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।

Indian Knowledge Tradition: नालंदा विश्वविद्यालय एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 21 और 22 सितंबर को ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया जाएगा. इसमें देशभर के शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्वान भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता और विकसित भारत के निर्माण में उसकी संभावित भूमिका पर विचार-विमर्श करेंगे.

21 सितंबर को होगा परिसंवाद का उद्घाटन

परिसंवाद का उद्घाटन 21 सितंबर को सुबह 11 बजे नालंदा विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागृह में होगा. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी विषय प्रवर्तन करेंगे.

शिक्षाविद् प्रो. रमेश भारद्वाज परिसंवाद की प्रस्तावना प्रस्तुत करेंगे, जबकि यूजीसी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार रखेंगे. शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी का सारस्वत उद्बोधन भी होगा.

‘नालन्दा-बोध’ व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा

उद्घाटन के बाद विशेष सत्र में ‘नालन्दा-बोध’ व्याख्यान आयोजित किया जाएगा. इसमें डॉ. अतुल कोठारी ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और नालंदा-बोध’ विषय पर व्याख्यान देंगे.

भारतीय भाषाओं से लेकर पर्यावरण तक होंगे सत्र

परिसंवाद के दौरान भारतीय भाषाओं, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर चर्चा होगी. इसके साथ ही वेद, उपनिषद, दर्शन, बौद्ध तर्कशास्त्र, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, कृषि, जल प्रबंधन, कला, साहित्य और लोकज्ञान जैसी विधाओं के योगदान पर भी मंथन किया जाएगा.

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि के बीच संवाद के माध्यम से विकसित भारत 2047 की संकल्पना को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के संदर्भ में समझने का प्रयास किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

By निरंजन कुमार

निरंजन कुमार प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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