Malmas Mela 2026(रामविलास): पुरुषोत्तम (अधिमास) की इस पावन आध्यात्मिक बेला में राजगीर का ऐतिहासिक राजकीय मलमास मेला श्रद्धा, अटूट आस्था और सनातन परंपरा के एक अद्भुत त्रिवेणी संगम का साक्षी बन रहा है. जैसे-जैसे मेले के दिन आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था का प्रवाह भी महासमुद्र का रूप लेता जा रहा है. रविवार को राजगीर का पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया और दोपहर में लू के थपेड़े लगातार लोगों को झुलसाते रहे. लेकिन, सनातन धर्म और पुण्य कमाने की भावना के आगे मौसम की यह कठोरता पूरी तरह फीकी पड़ गई.
तड़के 4 बजे से ही उमड़ा हुजूम, पंडा कमिटी ने की डेढ़ लाख की पुष्टि
राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमिटी के प्रवक्ता सुधीर कुमार उपाध्याय ने आधिकारिक आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि मलमास मेले के आठवें दिन रविवार को रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ी. करीब डेढ़ लाख से अधिक महिला, पुरुष, बच्चों और वृद्ध श्रद्धालुओं ने राजगीर के विभिन्न पौराणिक पवित्र कुंडों और नदियों में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया.
रविवार की भोर (तड़के सुबह) 4:00 बजे से ही मुख्य ब्रह्मकुंड एवं सप्तधारा कुंड की ओर जाने वाले रास्तों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ना शुरू हो गया था. कुंड स्नान के लिए भक्तों की मील लंबी कतारें लगी रहीं, और यह सिलसिला देर शाम तक अनवरत चलता रहा.
प्रशासन का जिग-जैग मैनेजमेंट हुआ सुपर हिट; बिना धक्का-मुक्की के हो रहा स्नान
भीषण गर्मी में उमड़ने वाली इस अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नालंदा जिला प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा और सुविधा के इंतजाम बेहद कारगर साबित हुए हैं. पुरुष और महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग सुव्यवस्थित ‘जिग-जैग’ (Zig-Zag) स्टील बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है. इस बेहतरीन कतार प्रबंधन के कारण इतनी विशाल भीड़ के बावजूद मेला क्षेत्र में कहीं भी अव्यवस्था, भगदड़ या धक्का-मुक्की जैसी अप्रिय स्थिति देखने को नहीं मिल रही है. श्रद्धालु बेहद शांति और अनुशासन के साथ कतार में अपनी बारी का इंतजार करते हुए सहजता से सप्तधारा और ब्रह्मकुंड में प्रवेश कर स्नान कर रहे हैं.
पापों से मुक्ति दिलाती है सप्तधारा, ‘हर-हर महादेव’ से गूंजी वादियां
सनातन धर्म में मान्यता है कि मलमास के दौरान राजगीर की इन पवित्र जलधाराओं और ब्रह्मकुंड में स्नान करने से मनुष्य के जन्मों-जन्मों के पापों का क्षय होता है और उसे परम आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है.
मुख्य ब्रह्मकुंड में मुख्य स्नान करने के बाद श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ वैतरणी नदी, सूर्यकुंड, चंद्रमा कुंड, नारद कुंड, अहिल्या कुंड, श्रीराम-लक्ष्मण कुंड और गौरीकुंड सहित अन्य सभी पौराणिक कुंडों में भी स्नान, तर्पण और पूजा-अर्चना कर रहे हैं. भारत के विभिन्न राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बंगाल आदि) से पहुंचे श्रद्धालुओं के जयघोष, मधुर भजनों, ‘ब्रह्म बाबा की जय’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी नारों से पूरी राजगीर नगरी इस वक्त देवलोक जैसी प्रतीत हो रही है.
कड़ाके की धूप और भीषण उमस के बीच उमड़ता यह हुजूम साफ़ बयां कर रहा है कि भारत की लोकआस्था और सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहाँ मौसम की मार भी श्रद्धालुओं के कदमों को डिगाने में पूरी तरह असफल साबित हुई है.
