बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
PM Awas Yojana: नालंदा जिले में महत्वाकांक्षी ”प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)” की रफ्तार पर ब्रेक लगता दिख रहा है. जिले के सभी बीस प्रखंडों में योजना के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत काफी सुस्त है. निर्धारित लक्ष्य 20,730 के मुकाबले अब तक 20,661 लाभुकों (99.67 प्रतिशत) की सूची स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन वास्तविक निर्माण बेहद धीमा है.
आंकड़ों के मुताबिक, 19,992 लाभुकों को पहली किस्त, 19,684 को दूसरी किस्त और 14,865 लाभुकों को अंतिम तीसरी किस्त की राशि जारी की जा चुकी है. इसके बावजूद अब तक केवल 10,814 गरीबों ने ही अपने मकान का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न किया है. हालांकि, इस सुस्ती के बीच सरमेरा और कतरीसराय प्रखंड ने अपने तय लक्ष्य के मुकाबले 100 प्रतिशत मकानों का निर्माण मुकम्मल कर जिले में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है.
थरथरी और करायपरसुराय निकले सबसे फिसड्डी
दूसरी ओर, कुछ प्रखंडों की भारी सुस्ती के कारण नालंदा जिला राज्य की रैंकिंग में लगातार पिछड़ रहा है. योजना के क्रियान्वयन में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों में थरथरी पहले पायदान पर है, जहां 1,027 के लक्ष्य के मुकाबले अब तक मात्र 417 यानी सिर्फ 58 प्रतिशत लाभुक ही अपना मकान पूरा कर पाए हैं. इस फिसड्डी सूची में दूसरा स्थान करायपरसुराय प्रखंड का है, जहां 248 के लक्ष्य के विपरीत केवल 136 यानी 60 प्रतिशत मकान ही बनकर तैयार हो सके हैं.
इस बदहाली पर स्थानीय ग्रामीण गणेश प्रसाद और जीवेश राम का कहना है कि सरकार द्वारा समय पर राशि जारी किए जाने के बाद भी आखिर इन प्रखंडों में काम की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है. ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन की ढिलाई या लाभुकों द्वारा राशि का अन्य मदों में इस्तेमाल करने की आशंका जताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
डीडीसी का पद खाली होने से मॉनिटरिंग हुई ठप
इस सुस्ती के पीछे के कारणों को खंगालने पर कई चौंकाने वाले प्रशासनिक तथ्य सामने आए हैं. विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों राजगीर में आयोजित ऐतिहासिक मलमास मेला और वर्तमान में जिले में उपविकास आयुक्त (डीडीसी) का महत्वपूर्ण पद खाली होने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की रफ्तार सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है.
शीर्ष समीक्षा अधिकारी के न होने से प्रशासनिक फैसलों और प्रखंडवार होने वाली समीक्षा बैठकों पर सीधा विपरीत असर पड़ा है. इसके अलावा, सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में इस योजना को लेकर मुख्यालय से स्थानीय स्तर के अधिकारियों के लिए कोई नया या विशेष दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) जारी नहीं किया गया है. नए कड़े आदेशों के अभाव में निचले स्तर पर आवास निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग (निगरानी) का काम पूरी तरह से सुस्त पड़ गया है.
तकनीकी खराबी और पोर्टल बंद होने से रुका डेटा
मामले पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक (डायरेक्टर) ने अपनी सफाई में बताया कि कुछ महीने पहले तक योजना का मुख्य ऑनलाइन पोर्टल नहीं खुल रहा था. इस तकनीकी खराबी और पोर्टल बंद रहने के कारण डेटा अपडेट करने का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे धरातल पर हुई प्रगति की सही रिपोर्ट समय पर दर्ज नहीं हो सकी.
यदि प्रखंडवार लक्ष्य और उपलब्धि के आंकड़ों को देखें, तो रहुई में 715 में 363, चंडी में 2080 में 994, इस्लामपुर में 1200 में 289, बिहारशरीफ में 3303 में 1491, नूरसराय में 2457 में 1309, हरनौत में 1800 में 925, गिरियक में 786 में 315, हिलसा में 1490 में 691, सिलाव में 631 में 373, अस्थावां में 964 में 737, एकंगरसराय में 1312 में 899, बिंद में 96 में 87, नगरनौसा में 582 में 500, बेन में 1069 में 468 और परवलपुर में 334 में से केवल 218 मकान ही पूरे हो सके हैं.
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