Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में आधुनिक गैजेट्स, ब्रांडेड उत्पादों और नई बाइकों की बढ़ती चाहत ने युवाओं की खरीदारी की आदतों को बदल दिया है. आसान ईएमआई सुविधा के चलते अब बड़ी संख्या में युवा बिना पर्याप्त बचत के महंगे सामान खरीद रहे हैं. जिले में ईएमआई आधारित कारोबार 40 करोड़ रुपये मासिक के आंकड़े को पार कर चुका है, जबकि वित्तीय विशेषज्ञ बढ़ते कर्ज के खतरे को लेकर चेतावनी दे रहे हैं.
हर दिन 350 से 500 लोग खरीद रहे सामान किस्तों पर
वित्तीय कंपनियों और बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार नालंदा में प्रतिदिन करीब 350 से 500 उपभोक्ता ईएमआई के जरिए मोबाइल, लैपटॉप, बाइक और अन्य उत्पाद खरीद रहे हैं. कुछ साल पहले तक सीमित रहने वाली यह सुविधा अब जिले के अधिकांश बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है.
15 करोड़ से बढ़कर 40 करोड़ रुपये पहुंचा कारोबार
जानकारों के मुताबिक वर्ष 2016 के आसपास जिले में ईएमआई आधारित कारोबार लगभग 15 करोड़ रुपये मासिक था. लेकिन आसान ऋण प्रक्रिया, कम दस्तावेजी औपचारिकताओं और त्वरित स्वीकृति के कारण अब यह बढ़कर 40 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. त्योहारी सीजन और ऑनलाइन सेल के दौरान इसमें और तेजी देखने को मिलती है.
स्मार्टफोन बना युवाओं की पहली पसंद
दुकानदारों का कहना है कि ईएमआई पर सबसे अधिक बिक्री स्मार्टफोन की हो रही है. इसके अलावा टैबलेट, लैपटॉप, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, वाशिंग मशीन, फर्नीचर और दोपहिया वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. 15 हजार से 80 हजार रुपये तक का ऋण आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवा वर्ग आकर्षित हो रहा है.
छात्रों में भी बढ़ रहा किस्तों पर खरीदारी का चलन
कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र भी महंगे मोबाइल और लैपटॉप ईएमआई पर खरीद रहे हैं. कई युवा अपनी आय या पारिवारिक बजट का पूरा आकलन किए बिना ही किस्तों के जाल में फंसते जा रहे हैं.
बढ़ रहा ईएमआई का बोझ, जब्ती तक पहुंच रहे मामले
वित्तीय क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार हर महीने ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां ग्राहक समय पर किस्त जमा नहीं कर पाते. इसके बाद फाइनेंस कंपनियां मोबाइल, टीवी, बाइक और अन्य वित्तपोषित सामानों की जब्ती की कार्रवाई भी करती हैं. कई लोगों पर एक साथ दो या तीन ईएमआई चलने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
सोशल मीडिया और दिखावे की संस्कृति का असर
समाजशास्त्रियों का मानना है कि सोशल मीडिया, डिजिटल विज्ञापन और बदलती जीवनशैली ने युवाओं में ब्रांडेड और आधुनिक उत्पादों की चाहत को बढ़ा दिया है. कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे की भावना भी लोगों को अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित करती है.
विशेषज्ञों ने दी जिम्मेदार उधारी की सलाह
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ईएमआई सुविधा अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन बिना योजना के लगातार ऋण लेना आर्थिक तनाव का कारण बन सकता है. बैंक कर्मी विजय कुमार के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुल मासिक ईएमआई उसकी आय के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. इससे घरेलू बजट संतुलित रहता है और भविष्य में आर्थिक संकट की संभावना कम होती है.
वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि नालंदा में बढ़ते ईएमआई कारोबार के साथ-साथ लोगों को वित्तीय प्रबंधन और जिम्मेदार उधारी के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है. ताकि सुविधा के साथ आर्थिक अनुशासन बना रहे और युवा कर्ज के बढ़ते बोझ से बच सकें.
