नालंदा में बर्फ की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड, एक माह में 140 प्रतिशत बढ़ी खपत

Nalanda News: नालंदा में पड़ रही भीषण गर्मी और राजगीर मलमास मेले के कारण बर्फ की मांग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. महज एक महीने के भीतर बर्फ की खपत में 140 प्रतिशत और इसकी कीमतों में 150 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है.

Nalanda News (बिहारशरीफ से कंचन कुमार): नालंदा जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और राजगीर में आयोजित राजकीय मलमास मेले ने बर्फ कारोबार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. बढ़ते तापमान और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण जिले में बर्फ की मांग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हालात यह हैं कि एक माह के भीतर बर्फ की खपत में 140 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कीमतों में 150 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है.

एक माह में 1500 किलो से बढ़कर 3600 किलो प्रतिदिन पहुंची खपत

बर्फ कारोबारियों के अनुसार एक माह पहले तक बिहारशरीफ शहर में प्रतिदिन करीब 1500 किलोग्राम बर्फ की खपत होती थी. वर्तमान में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 3600 किलोग्राम प्रतिदिन पहुंच गया है. गर्मी के बढ़ते प्रकोप और मलमास मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण बाजार में बर्फ की मांग लगातार बढ़ रही है.

50 किलो की बर्फ सिली 200 से बढ़कर 500 रुपये हुई

बढ़ती मांग का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. सामान्य दिनों में 50 किलोग्राम की एक बर्फ सिली 200 रुपये में बिकती थी, लेकिन अब इसकी कीमत 450 से 500 रुपये तक पहुंच गई है. कारोबारियों का कहना है कि मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है.

मेला और गर्मी ने बढ़ाया कारोबारियों पर दबाव

राजगीर में चल रहे राजकीय मलमास मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. मेले में शीतल पेय, जूस, लस्सी, छाछ, आइसक्रीम और खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदार बड़ी मात्रा में बर्फ खरीद रहे हैं. इसके अलावा होटल, धर्मशाला और रेस्तरां संचालकों की मांग भी तेजी से बढ़ी है.

मछली बाजार में सबसे ज्यादा खप रही बर्फ

जिले के मछली बाजारों में बर्फ की सिल्लियों की सबसे अधिक खपत हो रही है. मछलियों को ताजा बनाए रखने और परिवहन के दौरान खराब होने से बचाने के लिए बड़ी मात्रा में बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है. मछली लाने वाले ट्रकों और थोक बाजारों में भी बर्फ की मांग लगातार बढ़ी हुई है.

फल, फूल और सब्जी कारोबारियों का भी बढ़ा उपयोग

फल, फूल और सब्जी विक्रेता भी अपने उत्पादों को ताजा बनाए रखने के लिए बर्फ का उपयोग कर रहे हैं. दूर-दराज के बाजारों में भेजी जाने वाली हरी सब्जियों, फलों और फूलों की खेप में बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे सामान लंबे समय तक सुरक्षित और ताजा बना रहता है.

नवादा, गया और पटना से मंगानी पड़ रही बर्फ

स्थानीय उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं होने के कारण कारोबारियों को नवादा, गया और पटना से भी बर्फ मंगानी पड़ रही है. बाहरी जिलों से आपूर्ति के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है, जिसका असर खुदरा कीमतों पर भी पड़ रहा है. यदि यह आपूर्ति बंद हो जाए तो बाजार में बर्फ का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

जिले में 12 से 18 फैक्ट्रियों में हो रहा उत्पादन

जानकारी के अनुसार नालंदा जिले में वर्तमान समय में 12 से 18 बर्फ फैक्ट्रियां संचालित हैं. इन फैक्ट्रियों में प्रतिदिन 14,400 से 21,600 किलोग्राम तक बर्फ सिली का उत्पादन किया जा रहा है. सबसे अधिक खपत बिहारशरीफ, राजगीर, हिलसा और हरनौत क्षेत्र में दर्ज की जा रही है.

बिजली कटौती से उत्पादन पर पड़ रहा असर

बर्फ फैक्ट्री संचालकों के अनुसार एक लॉट बर्फ की सिल्ली तैयार होने में लगभग 24 घंटे का समय लगता है. लगातार बिजली आपूर्ति मिलने पर ही बर्फ का उत्पादन सुचारू रूप से हो पाता है. लेकिन इन दिनों हो रही बिजली कटौती उत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, जिससे कई फैक्ट्रियां मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं.

छोटे कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

बिजली बाधित होने पर बर्फ का उत्पादन स्वतः कम हो जाता है, जिसका सीधा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ता है. जूस, शिकंजी, लस्सी, आइसक्रीम और ठंडे पेय पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों को समय पर पर्याप्त बर्फ नहीं मिल पा रही है. कई बार उन्हें अधिक कीमत देकर बर्फ खरीदनी पड़ रही है, जिससे उनका मुनाफा भी प्रभावित हो रहा है.

आर्थिक विकास के साथ बढ़ रही बर्फ की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में व्यापार, परिवहन, डेयरी, मांस उद्योग और कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार के साथ बर्फ की मांग लगातार बढ़ रही है. पिछले एक दशक में जिले में बर्फ उत्पादन क्षमता और फैक्ट्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसके बावजूद मौजूदा गर्मी और मेले की मांग ने उत्पादन क्षमता पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है.

आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम

कारोबारियों का कहना है कि यदि गर्मी का असर जारी रहा और मलमास मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती रही तो बर्फ की मांग में और वृद्धि होगी. ऐसे में कीमतों में भी और उछाल आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल जिले में बर्फ कारोबार अपने चरम पर है और बाजार की गतिविधियां पूरी तरह मौसम पर निर्भर हो गई हैं.

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Published by: Vikas Jha

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