बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Nalanda News: डिजिटल युग में मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है. केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न मोबाइल ऐप गांवों में किसानों, महिलाओं, मजदूरों और गरीब परिवारों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं. खेती, स्वास्थ्य, राशन, पेंशन और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं अब मोबाइल पर उपलब्ध होने से ग्रामीणों की दफ्तरों पर निर्भरता कम हुई है.
खेती और कारोबार के साथ डिजिटल तकनीक का सफल उपयोग
एकंगरसराय प्रखंड के मुजाहिदपुर गांव निवासी सुमीत कुमार उर्फ सोनू खेती के साथ लाइब्रेरी भी संचालित करते हैं. फसलों में बीमारी या फूल आने में देरी होने पर वे मोबाइल ऐप से जानकारी लेकर समय पर उपचार करते हैं, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन मिल रहा है. उनकी सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी डिजिटल तकनीक की मदद से खेती करने की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
महाराष्ट्र से खेती की निगरानी
गिरियक प्रखंड के दुर्गापुर गांव निवासी बिरजु कुमार महाराष्ट्र के नासिक में नौकरी करते हैं, जबकि उनकी पत्नी गांव में रहकर खेती संभालती हैं. बिरजु मोबाइल ऐप के माध्यम से खेती, टीकाकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी परिवार तक पहुंचाते रहते हैं. यह उदाहरण दिखाता है कि डिजिटल तकनीक ने दूर रहकर भी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाना आसान बना दिया है.
किसानों के लिए पीएम किसान और ई-नाम बने मददगार
जिले के किसानों के लिए पीएम किसान, किसान सुविधा और ई-नाम जैसे ऐप काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं. इन प्लेटफॉर्मों के जरिए किसान सम्मान निधि की स्थिति, मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव और फसल संबंधी सलाह आसानी से प्राप्त कर रहे हैं. इससे खेती से जुड़े निर्णय समय पर लेने में मदद मिल रही है और उत्पादन लागत कम करने में भी सहयोग मिल रहा है.
उमंग ऐप से एक मंच पर मिल रहीं कई सरकारी सेवाएं
उमंग ऐप के माध्यम से पेंशन, राशन, गैस, बिजली, भविष्य निधि और आयुष्मान जैसी कई सरकारी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं. डिजिटल सेवाओं ने समय और खर्च दोनों की बचत सुनिश्चित की है.
राशन और शिकायत निवारण भी हुआ ऑनलाइन
मेरा राशन ऐप और एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड व्यवस्था से प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत मिली है. वहीं जन शिकायत निवारण ऐप के जरिए सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और राशन से जुड़ी शिकायतें सीधे दर्ज की जा रही हैं. इससे समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी हुई है.
स्वास्थ्य सेवाओं में मोबाइल ऐप ने लाया बड़ा बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत, ई-संजीवनी ओपीडी और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता जैसे ऐप ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं. ई-संजीवनी के माध्यम से मरीज घर बैठे डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श ले रहे हैं, जबकि आयुष्मान योजना के तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है.
आभा ऐप से मिली डिजिटल स्वास्थ्य पहचान
आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) ऐप के जरिए लोगों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान उपलब्ध कराई जा रही है. इसमें इलाज, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, जिसे जरूरत पड़ने पर किसी भी अस्पताल में साझा किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में सुधार होगा.
भूमि और आवास संबंधी जानकारी भी मोबाइल पर
भूमि जानकारी ऐप के माध्यम से किसान अपनी जमीन का खाता, नक्शा और जमाबंदी मोबाइल पर देख पा रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना और श्रमिक कल्याण ऐप के जरिए आवास, पंजीकरण और सरकारी सहायता से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल रही है. इससे ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ रहे हैं.
ई-शिक्षाकोष से स्कूलों में बढ़ी डिजिटल निगरानी
बिहार के सरकारी स्कूलों में ई-शिक्षाकोष ऐप के जरिए शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है. शिक्षकों को जीपीएस आधारित सेल्फी से हाजिरी लगानी होती है, जबकि छात्रों की उपस्थिति फेस स्कैनिंग के माध्यम से दर्ज की जाती है. सरकार का दावा है कि इससे स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी.
सीमित इंटरनेट में भी उपयोगी साबित हो रहे ऐप
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए भीम यूपीआई, गूगल गो और फेसबुक लाइट जैसे ऐप काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. कम डाटा में संचालित होने वाले ये ऐप डिजिटल सेवाओं को दूर-दराज गांवों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. इससे डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती मिल रही है.
ऐप की बढ़ती संख्या से साइबर ठगी का खतरा
हालांकि विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हर सेवा के लिए अलग-अलग ऐप की व्यवस्था पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अधिक ऐप डाउनलोड करने से मोबाइल की क्षमता प्रभावित होती है और साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ जाता है. उन्होंने सरकार से सुरक्षित और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने की मांग की है, ताकि लोगों को सुविधा के साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके.
