Nalanda News(संतोष कुमार पार्थ): नालंदा के हिलसा शहर को जाम के झाम से परमानेंट मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से अनुमंडल प्रशासन द्वारा जोर-शोर से लागू की गई नई ट्रैफिक व्यवस्था महज 8 दिनों के भीतर ही पूरी तरह बेअसर और फेल साबित हो रही है. प्रशासनिक सख्ती और दावों के बड़े-बड़े विज्ञापनों के बावजूद शहर के मुख्य और संकीर्ण बाजार क्षेत्रों में नो-एंट्री के समय भी भारी वाहनों का प्रवेश धड़ल्ले से जारी है. इसके कारण आम नागरिकों, पैदल यात्रियों और स्कूली बच्चों को रोजाना भीषण जाम और उमस भरी गर्मी में तड़पने को मजबूर होना पड़ रहा है.
15 मई से लागू हुई थी व्यवस्था; 12 घंटे की थी नो-एंट्री
दरअसल, हिलसा अनुमंडल प्रशासन और नगर परिषद ने मिलकर गत 15 मई से शहर के लिए एक नई ट्रैफिक गाइडलाइन जारी की थी. इस नई व्यवस्था के तहत प्रतिदिन सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक (कुल 12 घंटे) शहर की सीमा के भीतर बस, ट्रक और ट्रैक्टर जैसे भारी व व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध (नो-एंट्री) लगाया गया था. इस नियम को धरातल पर कड़ाई से लागू करवाने के लिए प्रशासन द्वारा शहर के 3 सबसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर मजबूत ड्रॉप गेट भी स्थापित किए गए थे. लेकिन शुरुआत से ही अधिकारियों और कर्मियों की लापरवाही के कारण यह पूरी योजना कागजी साबित होने लगी.
ड्रॉप गेट से पुलिस फोर्स गायब, नगर परिषद के कर्मी दिखे असहाय
प्रशासन की इस पूरी नाकामी की मुख्य वजह ड्रॉप गेट्स और चेक पोस्ट्स पर भारी अव्यवस्था का होना है. शहर के नवनिर्मित बस स्टैंड, बिहारी रोड स्थित कस्तूरबा विद्यालय के सामने तथा दनियामा रोड स्थित कामता हॉल्ट के पास ड्रॉप गेट बनाए गए हैं. इन तीनों ही संवेदनशील पॉइंट पर सुरक्षा और गाड़ियों को मोड़ने के लिए पुलिस बल तैनात ही नहीं है. पुलिस की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर भारी वाहनों के चालक बेखौफ होकर ड्रॉप गेट को पार कर मुख्य बाजार क्षेत्र में एंट्री कर रहे हैं. शहर के व्यस्ततम सिनेमा मोड़, पटेल नगर, योगीपुर मोड़ और रेलवे स्टेशन इलाके से पैसेंजर बसों का संचालन बिना किसी रोक-टोक के दिन के उजाले में भी जारी है. वर्तमान में स्थिति यह है कि ड्रॉप गेट पर केवल नगर परिषद के चंद दैनिक कर्मी तैनात हैं, जो पर्याप्त पुलिस सहयोग और लाठी बल के अभाव में दबंग ट्रक और बस चालकों को रोक पाने में खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं.
अधिकारियों का दावा: पुलिस बल के लिए भेजा गया है पत्र
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन ने ट्रैफिक सुधार को लेकर सोशल मीडिया और अखबारों में बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत ढाक के तीन पात वाली है. जब तक इन ड्रॉप गेट्स पर परमानेंट पुलिस बल की तैनाती नहीं होगी और उल्लंघन करने वाले वाहनों का भारी चालान नहीं काटा जाएगा, तब तक हिलसा को जाम से मुक्ति मिलना असंभव है.
इस पूरे मामले और अव्यवस्था के संबंध में अमित कुमार पटेल ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए बताया कि ड्रॉप गेट और नो-एंट्री जोन में पुलिस बल की भारी कमी है. इस समस्या को दूर करने और पर्याप्त संख्या में जिला पुलिस बल के जवानों की प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित वरीय अधिकारियों और विभाग को आधिकारिक पत्र भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही फोर्स उपलब्ध होते ही व्यवस्था को सख्ती से लागू कराया जाएगा.
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