Nalanda News(विवेकानंद): नालंदा जिले के छोटे-छोटे मत्स्य कारोबारियों, फुटकर विक्रेताओं और मछुआरों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने तथा उनकी पारिवारिक आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से बिहार सरकार और मत्स्य विभाग द्वारा एक बेहद महत्वाकांक्षी पहल की गई है. जिले में मछली पालन और इसकी बिक्री को सुरक्षित व लाभकारी बनाने के लिए ‘मछली कल्याण सह विपणन कीट (किट) योजना’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है. इस योजना के तहत मत्स्य व्यवसाय से जुड़े स्थानीय विक्रेताओं को विभाग द्वारा अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निःशुल्क और भारी अनुदान पर विशेष मत्स्य विपणन किट उपलब्ध कराई जा रही है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर वर्ष 2026 तक जिले के कुल 40 चिन्हित मछली विक्रेताओं को इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत लाभान्वित करते हुए किट प्रदान की जा चुकी है.
मछलियों को लंबे समय तक ताजा रखने में मिलेगी मदद, उपभोक्ताओं को मिलेगी शुद्धता
इस विशेष योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हाट-बाजारों में ताजी और गुणवत्तापूर्ण मछली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. अक्सर देखा जाता है कि उचित रख-रखाव और संसाधनों की कमी के कारण छोटे दुकानदारों की मछलियां जल्द खराब हो जाती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. विभाग द्वारा दी जा रही इस आधुनिक किट की मदद से अब मछलियों को लंबे समय तक पूरी तरह ताजा और हाइजीनिक (सुरक्षित) रखा जा सकेगा. इससे न केवल मछली विक्रेताओं का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली ताजी मछलियां खाने को मिलेंगी.
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बजट, जानें कितना मिलेगा अनुदान
जिला मत्स्य पदाधिकारी का वक्तव्य: योजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए जिला मत्स्य पदाधिकारी सह कार्यपालक पदाधिकारी शम्भू कुमार पटेल ने बताया कि इस विशेष मत्स्य विपणन किट के तहत मछली विक्रेताओं को ‘फेंका जाल’, ‘मिलेनेट हाडी’ (इंसुलेटेड बॉक्स/आइस बॉक्स) और व्यापार के लिए जरूरी अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है.
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बजट और लागत को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- ग्रामीण क्षेत्र के लिए: किट की कुल इकाई लागत 19,000 रुपये निर्धारित की गई है.
- शहरी क्षेत्र के लिए: किट की कुल इकाई लागत 25,000 रुपये तय की गई है.
मिलेगा 70% सरकारी अनुदान: जिला मत्स्य पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत सरकार द्वारा कुल लागत पर 70 प्रतिशत का बंपर अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है. वहीं, शेष 30 प्रतिशत की राशि लाभार्थी को अपनी स्वयं की पूंजी के रूप में योगदान करनी होती है. इस दूरगामी योजना से जहां एक ओर मछली विक्रेताओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर नालंदा जिले के भीतर मत्स्य पालन और इससे जुड़े समग्र व्यवसाय को एक नई गति और नया बाजार मिल रहा है.
