नालंदा में मनरेगा में 7.66 लाख मजदूर पंजीकृत, लेकिन 38% जॉब कार्ड पड़े निष्क्रिय

Nalanda News : नालंदा जिले में मनरेगा योजना के तहत लाखों मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जॉब कार्डधारी अब भी रोजगार प्रक्रिया से बाहर हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में जारी 4.55 लाख जॉब कार्डों में से 38.26 प्रतिशत कार्ड निष्क्रिय हो चुके हैं.

Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में मनरेगा योजना के तहत लाखों मजदूर पंजीकृत हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जॉब कार्डधारी अब भी रोजगार प्रक्रिया से बाहर हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में जारी 4.55 लाख जॉब कार्डों में से 38.26 प्रतिशत कार्ड निष्क्रिय हो चुके हैं. प्रशासन अब निष्क्रिय कार्डधारियों की पहचान और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चला रहा है.

हर तीन में से एक जॉब कार्ड निष्क्रिय, बढ़ी चिंता

नालंदा में मनरेगा के तहत कुल 4,55,515 जॉब कार्ड जारी किए गए हैं, जिनसे 7,66,813 मजदूर जुड़े हुए हैं. इनमें केवल 2,81,278 जॉब कार्ड ही सक्रिय हैं, जबकि 1,74,237 जॉब कार्ड निष्क्रिय हो चुके हैं. पिछले तीन वर्षों में काम नहीं मांगने वाले लाभार्थियों को निष्क्रिय सूची में शामिल किया गया है.

महिलाओं ने दिखाई दमदार भागीदारी

जिले में पंजीकृत कुल मजदूरों में 4,05,709 महिलाएं हैं, जो कुल संख्या का 52.92 प्रतिशत हैं. वहीं सक्रिय मजदूरों की संख्या 3,13,847 है, जिनमें 1,68,719 महिलाएं शामिल हैं. सक्रिय मजदूरों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 53.75 प्रतिशत पहुंच गई है.

एससी वर्ग के सबसे ज्यादा कार्ड, लेकिन सक्रियता कम

मनरेगा के तहत जारी कुल जॉब कार्डों में 2,05,733 कार्ड अनुसूचित जाति वर्ग के हैं, जो कुल कार्डों का 45.16 प्रतिशत है. हालांकि सक्रियता के मामले में अन्य वर्ग आगे हैं. एससी वर्ग के केवल 82,880 जॉब कार्ड सक्रिय हैं, जबकि अन्य वर्ग के 1,98,398 कार्ड सक्रिय पाए गए हैं.

अस्थावां बना नंबर वन, बिंद और कतरीसराय फिसड्डी

प्रखंडवार आंकड़ों में अस्थावां सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रखंड बनकर उभरा है. यहां 46,424 जॉब कार्डों में से 35,639 सक्रिय हैं और सक्रियता दर 76.77 प्रतिशत दर्ज की गई है. दूसरी ओर बिंद में 53.71 प्रतिशत और कतरीसराय में 52.72 प्रतिशत जॉब कार्ड ही सक्रिय हैं.

प्रखंडों के बीच सक्रियता में बड़ा अंतर

नगरनौसा, इस्लामपुर, हिलसा और राजगीर जैसे प्रखंडों में मनरेगा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है. वहीं गिरियक, सरमेरा, बिंद और कतरीसराय जैसे क्षेत्रों में सक्रिय मजदूरों की संख्या कम बनी हुई है. इससे जिले में योजना के असमान प्रभाव की तस्वीर सामने आती है.

सत्यापन अभियान से होगी निष्क्रिय कार्डधारियों की पहचान

मनरेगा विभाग पंचायत स्तर पर जॉब कार्ड और मजदूरों का सत्यापन अभियान चला रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए निष्क्रिय कार्डधारियों की समीक्षा की जा रही है. आधार सीडिंग और ई-केवाईसी पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है.

महिलाओं को जोड़ने के लिए चल रहा विशेष अभियान

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जीविका समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों की मदद ली जा रही है. प्रशासन का मानना है कि महिला श्रमिकों की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

रोजगार बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर तेज हुए प्रयास

मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि पंचायत स्तर पर रोजगार सृजन की नई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. निष्क्रिय जॉब कार्डों की लगातार निगरानी की जा रही है और पात्र परिवारों को नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है.

अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचे रोजगार

विभाग का उद्देश्य मनरेगा के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना है. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में सक्रिय जॉब कार्डों की संख्या बढ़ाने और मजदूरों की भागीदारी मजबूत करने के लिए विशेष अभियान जारी रहेगा.

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Published by: Vivek Singh

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