Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है. हालात यह हैं कि वर्ष 2025 में प्रतिदिन औसतन 76 वाहन बिके, जबकि केवल 28 नए लाइसेंस जारी हुए. विशेषज्ञ इसे सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं.
पांच साल में बिके 1.75 लाख वाहन, सिर्फ 43 हजार लाइसेंस बने
वर्ष 2021 से 2025 के बीच जिले में 1,75,306 नए वाहनों की बिक्री हुई, जबकि इसी अवधि में केवल 43,124 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए. आंकड़े बताते हैं कि वाहन खरीदने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन लाइसेंसधारकों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी है.
हर साल 300 लोगों की जा रही जान, फिर भी नहीं टूट रही लापरवाही
नालंदा में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष करीब 300 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है. बढ़ते वाहन, नियमों की अनदेखी और नाबालिग चालकों की बढ़ती संख्या को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है.
8.26 करोड़ का जुर्माना वसूला, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था जस की तस
यातायात पुलिस ने बीते वर्ष नियम उल्लंघन के मामलों में 8 करोड़ 26 लाख 63 हजार 900 रुपये का जुर्माना वसूला. इस दौरान 8,071 वाहनों पर कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद यातायात अनुशासन में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है.
दोपहिया चालकों पर सख्ती, चारपहिया वाहन जांच पर उठे सवाल
कार्रवाई के आंकड़ों के अनुसार 8,071 वाहनों में से 8,032 दोपहिया और केवल 39 चारपहिया वाहन शामिल थे. इससे जांच अभियान की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
महिलाओं के नाम पर वाहन ज्यादा, लाइसेंसधारी बेहद कम
पिछले सात वर्षों में जारी 67,970 लाइसेंसों में केवल 2,788 महिलाओं के नाम शामिल हैं. वहीं चारपहिया वाहनों के करीब 41 प्रतिशत पंजीकरण महिलाओं के नाम पर दर्ज हैं. यह आंकड़ा वाहन स्वामित्व और वास्तविक लाइसेंसधारिता के बीच बड़ा अंतर दर्शाता है.
ई-रिक्शा बने नई चुनौती, बिना लाइसेंस चालक बढ़ा रहे जोखिम
वर्ष 2021 से 2025 के बीच जिले में 11,668 ई-रिक्शा की बिक्री हुई है. अनुमान है कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन चला रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है.
नाबालिग चालक भी बन रहे हादसों की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार जिले में 20 से 24 प्रतिशत तक किशोर वाहन चलाते देखे जा रहे हैं. बाइक, स्कूटी, कार और ई-रिक्शा तक नाबालिगों के हाथों में नजर आ रहे हैं, जो सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है.
लाइसेंस बनवाने में दलाली और जटिल प्रक्रिया से बढ़ी परेशानी.
सूत्रों के अनुसार कई लोग नालंदा के बजाय नवादा, शेखपुरा और पटना जैसे जिलों से लाइसेंस बनवा रहे हैं. स्थानीय स्तर पर प्रक्रिया को जटिल और समय लेने वाली मानकर लोग दूसरे जिलों का रुख कर रहे हैं. वहीं बिचौलियों की सक्रियता को लेकर भी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं.
सड़क सुरक्षा के लिए अब व्यापक रणनीति की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती वाहन संख्या, धीमी लाइसेंस प्रक्रिया, नाबालिग चालकों की मौजूदगी और ई-रिक्शा संचालन की कमजोर निगरानी सड़क सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. ऐसे में परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन को संयुक्त रणनीति बनाकर लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है.
