बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Nalanda News : जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों के बीच खैरा रोग तेजी से फैल रहा है. इस बीमारी की चपेट में आने वाले कुत्तों के शरीर से बाल झड़ रहे हैं तथा उनकी त्वचा पर घाव और पपड़ी बनने की शिकायतें सामने आ रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण संक्रमित कुत्तों की दो से तीन माह के भीतर मौत भी हो रही है.
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
बीमार कुत्तों की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखकर ग्रामीणों में भय का माहौल है. लोग संक्रमित कुत्तों को अपने घरों और बच्चों से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं. कई गांवों के लोगों ने बीमारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.
पशु चिकित्सकों ने बताया मैन्ज रोग
पशु चिकित्सक डॉ. अंजनी कुमार के अनुसार ग्रामीण जिस बीमारी को खैरा रोग कह रहे हैं, वह वास्तव में मैन्ज नामक त्वचा रोग है. यह माइट्स नामक सूक्ष्म परजीवियों के कारण होता है और संक्रमित कुत्तों में तेजी से फैल सकता है.
संक्रमित कुत्तों में गंभीर लक्षण
रोगग्रस्त कुत्तों के शरीर में गोलाकार स्थानों से बाल झड़ना, तेज खुजली होना और त्वचा का लाल पड़ जाना प्रमुख लक्षण हैं. कई मामलों में घाव, खुरंड और दुर्गंधयुक्त संक्रमण भी पाया गया है.
सामूहिक उपचार की मांग
गिरियक प्रखंड के दुर्गापुर तथा बिहारशरीफ सहित कई इलाकों के लोगों ने जिला प्रशासन से बीमार कुत्तों के सामूहिक उपचार की व्यवस्था करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बीमारी का फैलाव और बढ़ सकता है.
इंसानों में भी संक्रमण की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार मैन्ज रोग के कुछ प्रकार इंसानों में भी फैल सकते हैं. संक्रमित कुत्तों के संपर्क में आने पर त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली और जलन जैसी समस्याएं हो सकती है. बच्चों तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
साफ-सफाई और उपचार है बचाव का उपाय
पशु चिकित्सकों के अनुसार नियमित रूप से मेडिकेटेड शैम्पू से स्नान, आवश्यक दवाओं का उपयोग तथा पौष्टिक आहार इस रोग के उपचार में सहायक हैं. संक्रमित कुत्तों को साफ और सूखी जगह पर रखना तथा पर्याप्त धूप दिलाना भी जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार और स्वच्छता के माध्यम से बीमारी के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है.
