Nalanda News : लंबे समय से प्रतीक्षित इस्लामपुर नगर परिषद की बोर्ड बैठक गुरुवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई. विकास योजनाओं के चयन और बैठक की कार्यवाही को लेकर वार्ड पार्षदों तथा अधिकारियों के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हंगामे और हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई. स्थिति बिगड़ने पर इस्लामपुर थाना पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.
योजना चयन और प्रोसिडिंग पर पार्षदों ने उठाए सवाल
बैठक के दौरान कई वार्ड पार्षदों ने आरोप लगाया कि कार्यवाही पंजी (प्रोसिडिंग) में उनकी सहमति के बिना योजनाएं जोड़ दी जाती हैं. उनका कहना था कि कई प्रस्तावों को बहुमत नहीं मिलने के बावजूद स्वीकृत मान लिया जाता है.
वार्ड पार्षद गुड्डू कुमार, आरती देवी, सानिया गुप्ता, दिनेश पासवान, प्रतिभा सिन्हा समेत अन्य सदस्यों ने योजना चयन में पारदर्शिता नहीं बरतने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि वार्डों से जुड़े विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं को बैठक में गंभीरता से नहीं सुना जाता.
हंगामा बढ़ा तो पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिछली बैठक की कार्यवाही पंजी उपलब्ध कराने की मांग के साथ ही विवाद शुरू हो गया. बहस बढ़ते-बढ़ते तू-तू, मैं-मैं और फिर हाथापाई जैसी स्थिति तक पहुंच गई. सूचना मिलने पर इस्लामपुर थाना पुलिस नगर परिषद कार्यालय पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया.
कार्यपालक पदाधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार
नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी पूजा माला ने कहा कि 26 वार्डों में से 22 वार्ड पार्षद बैठक में मौजूद थे और बैठक नियमानुसार चल रही थी. उनके अनुसार कुछ पार्षदों के आपसी विवाद के कारण माहौल बिगड़ा, जिसे पुलिस की मदद से नियंत्रित कर लिया गया. उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बोर्ड की बैठक नियमों के अनुरूप संचालित की गई.
बैठक खत्म होने के बाद भी जारी रही नोकझोंक
बैठक समाप्त होने के बाद कार्यपालक पदाधिकारी और उप मुख्य पार्षद तनवीर आलम अपने-अपने कक्ष में चले गए, लेकिन सभाकक्ष के बाहर भी कुछ वार्ड पार्षदों के बीच योजनाओं और बैठक की कार्यवाही को लेकर बहस जारी रही.
सत्तापक्ष-विपक्ष आमने-सामने, जांच की उठी मांग
बैठक में 22 वार्ड पार्षद उपस्थित थे, जिनमें नौ सत्तापक्ष और 13 विपक्षी खेमे से बताए गए. कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि समर्थन करने वाले वार्डों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अन्य वार्डों की समस्याओं की अनदेखी की जाती है.
हालांकि, इन आरोपों पर नगर परिषद प्रशासन ने असहमति जताई है. अब नगर परिषद की कार्यप्रणाली और विकास योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि इन आरोपों की जांच होती है या नहीं.
